अयोध्या में बनेगा 150 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल: दिवंगत राजा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा की स्मृति में 6 एकड़ भूमि दान, गुरु पूर्णिमा पर होगा बैनामा
अयोध्या सहित संपूर्ण अवध प्रक्षेत्र के चिकित्सा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मुहैया कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक और कल्याणकारी कदम उठाया गया है। अयोध्या कैंसर केयर फाउंडेशन (एसीसीएफ) ने रामनगरी में प्रस्तावित 150 बिस्तरों (बेड्स) वाले विशाल कैंसर अस्पताल की स्थापना के लिए सभी आवश्यक प्रारंभिक दस्तावेजीकरण व विधिक कागजी प्रक्रियाएं शत-प्रतिशत पूरी होने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस महापरियोजना के लिए चिन्हित छह एकड़ विस्तृत भूमि को अधिकृत रूप से हस्तांतरित करने वाले दान अभिलेख (गिफ्ट डीड) पर आगामी 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के पावन व विधिक अवसर पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह अत्याधुनिक अस्पताल अयोध्या राजपरिवार के दिवंगत राजा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा की पावन स्मृति और जन-सेवा के मूल्यों को समर्पित किया जा रहा है।
इस बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल अयोध्या जनपद, बल्कि इससे सटे पड़ोसी जिलों—गोंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, बाराबंकी और बस्ती प्रक्षेत्र के लाखों नागरिकों और कैंसर पीड़ितों को बेहद किफायती व उच्च स्तरीय चिकित्सा लाभ प्राप्त होगा। स्वास्थ्य विभाग और ट्रस्ट के अभियंताओं के विधिक आकलन के अनुसार, सभी आवश्यक वैधानिक व पर्यावरण स्वीकृतियां मिलने और निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद आगामी 24 महीनों (दो वर्ष) की तय समय सीमा के भीतर यह अस्पताल पूरी तरह से संचालित और जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। इस सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल के भीतर आंकोलॉजी (कैंसर विज्ञान) से जुड़ी हर छोटी-बड़ी एडवांस सुविधाएं, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, कैंसर सर्जरी और विश्वस्तरीय आधुनिक चिकित्सा उपकरण एक ही छत के नीचे उपलब्ध रहेंगे।
इस पुनीत कार्य के लिए दिवंगत राजा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के सुपुत्र यतींद्र मोहन प्रताप मिश्रा और उनके अनुज (चाचा) शैलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा ने अपनी पैतृक संपत्ति से अयोध्या स्थित यह छह एकड़ की बेशकीमती व्यावसायिक भूमि पूरी तरह से निशुल्क (दान स्वरूप) प्रदान की है। इस भूमि का विधिक स्वामित्व और कब्जा अयोध्या कैंसर केयर फाउंडेशन को सौंप दिया गया है, जो इस संपूर्ण अस्पताल परियोजना के पूर्ण निष्पादन, भौतिक निर्माण, भविष्य के रखरखाव और दैनिक प्रशासनिक संचालन के लिए विधिक रूप से उत्तरदायी होगा। उल्लेखनीय है कि यह प्रस्तावित अस्पताल राष्ट्रीय स्तर के ‘नमो कैंसर एक्सेस नेटवर्क’ (Namo Cancer Access Network) का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसका मुख्य विधिक उद्देश्य संपूर्ण देश के भीतर कैंसर देखभाल के बुनियादी ढांचे को जिला स्तर पर सुदृढ़ और सुलभ बनाना है।
अपने पूज्य पिता की स्मृति और उनके जीवन मूल्यों को रेखांकित करते हुए यतींद्र मिश्रा ने बेहद भावुक लहजे में कहा कि यह चिकित्सालय मेरे पिता के आदर्शों—करुणा, निस्वार्थ सेवा और समाज के जरूरतमंद व वंचित तबके की देखभाल को हमारी तरफ से एक सच्ची और स्थाई विधिक श्रद्धांजलि है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति भी विशेष रूप से आभार व्यक्त किया, जिनकी प्रशासनिक प्रेरणा, त्वरित विधिक अनुमतियों और दूरदर्शी मार्गदर्शन के कारण ही इस जनोपयोगी परियोजना को धरातल पर लाना संभव हो सका है। इस अस्पताल के निर्माण से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कैंसर मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ, दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों की दौड़ लगाने और भारी-भरकम आर्थिक बोझ उठाने से मुक्ति मिल जाएगी।

