क्या भारत में सिर्फ एक कॉलेज डिग्री के भरोसे बेहतर करियर बनाना अब मुश्किल होता जा रहा है? क्या देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने के बजाय केवल डिग्री तक सीमित कर रही है? ऐसे सवाल अब शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में गंभीर बहस का विषय बन चुके हैं। हाल ही में मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) सौरभ मुखर्जी ने एक पॉडकास्ट में इसी मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है।
सौरभ मुखर्जी ने दावा किया कि भारत में कई मामलों में 12वीं के बाद काम शुरू करने वाले युवा आर्थिक रूप से उन छात्रों से बेहतर स्थिति में पहुंच रहे हैं, जो कई वर्षों तक कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद भी रोजगार के लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल डिग्री हासिल करना सफलता की गारंटी नहीं है और युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा व व्यावहारिक अनुभव पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने अपनी बात के समर्थन में रोजगार से जुड़े आंकड़ों का भी हवाला दिया। उनके अनुसार, भारत में कॉलेज से निकलने वाले हर 100 स्नातकों में से केवल तीन छात्रों को ही ग्रेजुएशन वाले वर्ष में नौकरी मिल पाती है। उनका कहना है कि यह स्थिति उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर की ओर इशारा करती है।
हालांकि, शिक्षा और रोजगार के विशेषज्ञों का मानना है कि करियर की सफलता केवल डिग्री या बिना डिग्री होने पर निर्भर नहीं करती। रोजगार की संभावनाएं पढ़ाई के विषय, संस्थान की गुणवत्ता, तकनीकी कौशल, इंटर्नशिप, उद्योग की मांग और व्यक्ति की क्षमताओं जैसे कई कारकों पर आधारित होती हैं। इसी वजह से भारत की शिक्षा व्यवस्था, रोजगार क्षमता और स्किल डेवलपमेंट को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।

