केंद्र सरकार उत्पीड़न के मामलों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए मुआवजा राशि में 40% बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की दलील है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में बढ़ोतरी की वजह से ऐसा करना जरूरी हो गया है।
इसके साथ ही एससी-एसटी वर्ग के लिए विशेष थाने और अदालतें गठित करने के लिए भी राज्य सरकारों को विशेष अनुदान दिए जाने की तैयारी चल रही है।
हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार ET की एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार उत्पीड़न के शिकार एससी-एसटी वर्ग के पीड़ितों के लिए मुआवजे की रकम 40 फीसदी बढ़ाने की तैयारी में है। यही नहीं एससी/एसटी (उत्पीड़नों की रोकथाम) कानून को मजबूती से लागू करने के लिए विशेष थाने और अदालतें बनाने के लिए भी आर्थिक सहायता देने पर फोकस कर रही है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इस तरह का प्रस्ताव उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी को देखते हुए दिया है।
इस समय अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर एससी/एसटी वर्ग के पीड़ितों को 85,000 से लेकर 8.25 लाख रुपये तक मुआवजा दिया जाता है।
इस प्रस्ताव की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक अब न्यूनतम मुआवजा बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है, जो अधिकतम 12 लाख रुपये तक हो सकता है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार एससी/एसटी थानों के गठन के लिए राज्यों के एक बार 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की भी सोच रही है।
इन थानों पर जो बाद में खर्च आएंगे, वह संबंधित राज्य सरकारें उठाएंगी।
एससी/एसटी (उत्पीड़नों की रोकथाम) कानून के तहत विशेष थानों के गठन का प्रावधान है, लेकिन अभी तक सिर्फ सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ही ऐसे थाने बनाए हैं।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की व्यय समिति को मंजूरी के लिए भेजा गया है।

