दिलचस्प किस्सा राजीव रंजन के द्वारा बताया
इटावा में एक पंडितजी ने अपनी असलहा की दुकान के उद्घाटन के लिए नेताजी मुलायम सिंह यादव को नहीं बुलाया… फिर क्या हुआ… इसका एक बहुत दिलचस्प किस्सा पत्रकार राजीव रंजन ने बताया है.
इटावा में एक पंडित जी ने असलहा की दुकान खोली. इसका उद्घाटन हो गया. दुकान बढ़िया खुल गई. एक बार नेताजी का काफिला गुजर रहा था, तभी नेताजी की नजर दुकान पर पड़ी. पंडित जी बैठे थे. नेताजी उन्हें जानते थे.
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नेताजी ने तुरंत काफिला रोका. दुकान पर गए. कहा- अरे पंडित जी दुकान कब खोल ली. और हमें बुलाया भी नहीं. अब पंडितजी के पास कोई जवाब नहीं.
नेताजी बोले- नहीं नहीं पंडित जी दुकान खोली और हमें भूल गए… ये तो न करते. खैर… पंडित जी ने चाय नाश्ता नेताजी को कराया और खेद जताया. नेताजी मिलजुल के चले गए. लेकिन दिल दिमाग पर अलग ही छाप छोड़ गए.
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राजीव रंजन ने एक किस्सा और बताया- इटावा में एक मुस्लिम पत्रकार थे. अपना अखबार निकालते थे. रात दिन मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार के खिलाफ कुछ न कुछ लिखते थे.
हैरानी की बात नेताजी ने इस अखबार को पढ़ते थे. एक दिन अखबार नहीं आया, या कुछ नहीं लिखा मिला… ऐसा कुछ हुआ.
नेताजी ने कहा- अरे देखो… पत्रकार कहाँ है. कुछ खबर नहीं दिख रही.
तो पता चला पत्रकार बीमार हैं…. इस पर नेताजी ने पत्रकार को इलाज के लिए अहमदाबाद भेजा. पूरा इन्तेजाम कराया.
पत्रकार राजीव रंजन कहते हैं- नेताजी का स्टाइल यही था. रिश्ते बनाने में अलग ही इंसान थे. उनके काम का तरीका सबसे अलग था.

