दिल्ली -देहरादून हाईवे पर स्थित सिवाया गांव में रविवार को सांप्रदायिक सौहार्द्र की अनूठी मिसाल देखने को मिली।
कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क पर आए एक जनाजे को हाईवे पार कराने के लिए कांवड़ियों ने संयम बरतते हुए निकलने का रास्ता दिया। इस बीच उन्होंने डीजे बंद रखे और सभी शांति से खड़े रहे।
रविवार को दिल्ली-देहरादून इस हाईवे पर हजारों कांवड़िये पैदल चले जा रहे थे। इस बीच एक जनाजा आया जिसको हाईवे को क्रास करके कब्रिस्तान ले जाया जाना था। जनाजे में शामिल मुस्लिम समाज के नागरिक सड़क को पार करने के लिए रास्ता मिलने का इंतजार कर रहे थे। हाईवे पर तेजी से चल रहे पैदल कांवड़ यात्रियों में से कुछ का ध्यान जनाजे पर गया। उन्होंने तुरंत बाकी कांवड़ यात्रियों के कारवां को रोक दिया। कुछ कांवड़िये आपस में मानव श्रृंखला बनाकर हाईवे पर खड़े हो गए। इससे हाईवे पार करने के लिए रास्ता बन गया। इसके बाद जनाजे में शामिल लोग जनाजे को हाईवे को पार करके कब्रिस्तान की ओर ले गए। कांवड़िए तब तक खड़े रहे जब तक कि जनाजे में शामिल सभी लोग हाईवे के पार कब्रिस्तान की ओर नहीं बढ़ गए। इसस दौरान सैकड़ों कांवड़िये शांतिपूर्वक हाईवे पर रुके रहे।मिसाल देखने को मिली।
कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क पर आए एक जनाजे को हाईवे पार कराने के लिए कांवड़ियों ने संयम बरतते हुए निकलने का रास्ता दिया। इस बीच उन्होंने डीजे बंद रखे और सभी शांति से खड़े रहे।
रविवार को दिल्ली-देहरादून इस हाईवे पर हजारों कांवड़िये पैदल चले जा रहे थे। इस बीच एक जनाजा आया जिसको हाईवे को क्रास करके कब्रिस्तान ले जाया जाना था। जनाजे में शामिल मुस्लिम समाज के नागरिक सड़क को पार करने के लिए रास्ता मिलने का इंतजार कर रहे थे। हाईवे पर तेजी से चल रहे पैदल कांवड़ यात्रियों में से कुछ का ध्यान जनाजे पर गया। उन्होंने तुरंत बाकी कांवड़ यात्रियों के कारवां को रोक दिया। कुछ कांवड़िये आपस में मानव श्रृंखला बनाकर हाईवे पर खड़े हो गए। इससे हाईवे पार करने के लिए रास्ता बन गया। इसके बाद जनाजे में शामिल लोग जनाजे को हाईवे को पार करके कब्रिस्तान की ओर ले गए। कांवड़िए तब तक खड़े रहे जब तक कि जनाजे में शामिल सभी लोग हाईवे के पार कब्रिस्तान की ओर नहीं बढ़ गए। इसस दौरान सैकड़ों कांवड़िये शांतिपूर्वक हाईवे पर रुके रहे।

