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सिर्फ एक संख्या है, काबिलियत प्रदर्शन से साबित होती है।
जब हेत्वी और श्रुति मेरे दिल्ली कार्यालय से जुड़ीं, तब कई शुभचिंतकों ने सुझाव दिया था – “वे डेस्क संभालने के लिए बहुत छोटी हैं, आपको अपने आसपास अधिक अनुभवी लोगों को रखना चाहिए।”
आज उनका काम ही उन सभी आशंकाओं का सबसे बेहतरीन जवाब है।
हेत्वी, जिन्होंने मेरे कार्यालय में मुखर्जी फेलो के रूप में शुरुआत की और आज OSD की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, और श्रुति, जिन्होंने इंटर्न के रूप में शुरुआत की और आज मेरी लेजिस्लेटिव असिस्टेंट हैं, दोनों ने हर मोर्चे पर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है – चाहे वह मेरी संसदीय जिम्मेदारियां हों, मेहमानों और अपॉइंटमेंट्स का प्रबंधन हो, रिसर्च, विधायी कार्य हो या मेरे सार्वजनिक संबोधनों की तैयारी।
लेकिन जो बात मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वह है हर परिस्थिति में उनका नया दृष्टिकोण।
वे अलग सवाल पूछती हैं। वे समस्याओं को अलग नजरिए से देखती हैं। वे जल्दी सीखती हैं, जल्दी ढल जाती हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात, जिम्मेदारी लेने से कभी पीछे नहीं हटतीं।
पिछले कुछ दिनों में, जब से मैंने BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला है, दिल्ली आवास पर हजारों प्रिय कार्यकर्ताओं का आना-जाना लगा है। इस असाधारण व्यस्तता के बीच भी हेत्वी और श्रुति लगातार मुस्तैदी से जुटी रहीं – इस अतिरिक्त जिम्मेदारी को संभालते हुए भी अपने मूल कार्यों को उसी प्रतिबद्धता और प्रोफेशनलिज्म के साथ पूरा किया।
उनकी यह यात्रा इस बात की याद दिलाती है कि अनुभव मूल्यवान है, लेकिन उम्र अकेले कभी भी क्षमता, संभावना या प्रदर्शन का पैमाना नहीं हो सकती।
हमारी युवा पीढ़ी एक अलग तरह की ऊर्जा लेकर आती है – आत्मविश्वासी, तकनीक-सक्षम, अनुकूलनीय और पारंपरिक तरीकों को चुनौती देने को तैयार।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने हमारे युवाओं को “बदलाव के वाहक” कहा है और हाल ही में इस बात पर प्रकाश डाला है कि कैसे भारत की युवा पीढ़ी विकसित भारत 2047 की यात्रा में अपनी ऊर्जा को एक सकारात्मक शक्ति के रूप में लगा रही है।
हेत्वी और श्रुति अपने आप में इस नए भारत का जीवंत उदाहरण हैं – उम्र में युवा, लेकिन जिम्मेदारी में परिपक्व; दृष्टिकोण में नई, लेकिन क्रियान्वयन में सशक्त।
आप दोनों पर गर्व है।
सीखते रहो। सवाल पूछते रहो। जिम्मेदारी लेते रहे

