गंगा न्यूज़ 24 विशेष: कुंभ 2010 से 2027 तक – कितना बजट आया, क्या काम हुआ?
संपादक कुलदीप शर्मा व मनोज ठाकुर की विशेष रिपोर्ट
हरिद्वार में गंगा मैया के नाम से दुनिया जानती है, लेकिन कुंभ के नाम पर कितना पैसा आया और कितना लगा – ये जनता को जानना जरूरी है। सरकारी आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट:
1. 2010 महाकुंभ – सबसे बड़ा घोटाला वाला कुंभ
- कुल एक्शन प्लान: ₹590 करोड़ (केंद्र UPA – ₹565 करोड़, राज्य – ₹25 करोड़)
- खर्च: जुलाई 2010 तक ₹439.50 करोड़
- 311 काम 34 विभागों को, सिर्फ 82 काम मेले से पहले पूरे
- CAG 2011 रिपोर्ट: ₹43 करोड़ बर्बादी/अनावश्यक खर्च, ₹19.39 करोड़ बिना मंजूरी के 43 अतिरिक्त काम, ₹180.07 करोड़ के 54 काम अधूरे, ₹223 करोड़ तक अनियमितता
- सूचना आयुक्त अनिल शर्मा ने CBI जांच की सिफारिश की। RTI में खुलासा – नोडल अफसरों ने पैसा मेला अधिकारी के खाते में जमा ही नहीं किया।
2. 2016 अर्धकुंभ – कांग्रेस सरकार

- राज्य ने दिया: ₹375 करोड़ अपने संसाधन से, पहले ₹178 + ₹32.7 करोड़ जारी
- केंद्र ने दिया: शुरू में ₹0, ₹1000 करोड़ की मांग, फिर ₹500 करोड़ मांगा। NITI आयोग ने ₹166.67 करोड़ मंजूर, ₹164 करोड़ ही आया।
- मतलब पूरा कुंभ राज्य के पैसे से हुआ। CM हरीश रावत बोले थे – केंद्र सौतेला व्यवहार कर रहा है।
3. 2021 कुंभ – बीजेपी सरकार, कोरोना के कारण 21 दिन का

- केंद्र से ₹375 करोड़ Special Assistance
- राज्य प्लान: ₹1205 करोड़ (₹450 करोड़ स्थायी – 7 पुल, घाट, सड़क, बिजली सब-स्टेशन, कांवड़ पटरी, चिल्ला रोड, SIDCUL-धनौरी मार्ग + ₹750 करोड़ अस्थायी – टेंट सिटी)
- जमीन पर: ₹321 करोड़ स्थायी निर्माण, ₹473 करोड़ के 124 कार्य प्रगति पर, CM तीरथ सिंह रावत ने ₹120 करोड़ का लोकार्पण किया।
4. 2027 कुंभ (तिथि से अर्धकुंभ पर सरकार महाकुंभ की तैयारी में)
- प्रस्तावित बजट अब तक सबसे बड़ा: लगभग ₹1200 करोड़
- फोकस: बुनियादी ढांचा विस्तार, स्मार्ट सिटी, स्वच्छ कुंभ, सुरक्षा और सुविधा बढ़ोतरी
निष्कर्ष: 2010 से 2027 तक लगभग ₹3000 करोड़ से ज्यादा कुंभ के नाम पर आया। अगर ये पैसा ईमानदारी से हरिद्वार में लगता तो आज हरिद्वार धरती का स्वर्ग होता।
ये रिपोर्ट सरकार द्वारा जारी तथ्यों और CAG रिपोर्ट पर आधारित है।
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संपादक: कुलदीप शर्मा 9760008162

