विधानसभा 2027 के लिए सहारनपुर से अनेक दावे दार देखना होगा कि किसकी किस्मत चमकती है

आगामी 2027 विधानसभा के चुनावों की दस्तक प्रदेश नेतृत्व की छाछ को भी फूंक मार कर पीने की रणनीति, 33 मौजूदा विधायको के टिकट कटने की रणनीतिक कवायद के बीच जन्द सहारनपुर में भी अब एक नई बहस का आगाज हुआ है। कई अनसुलझे मुद्दों के थोथे भंवर में फंसे सहारनपुर की जनता ने भी अब बदलाव को तरजीह देने का मन बनाने के संकेत देने शुरू कर दिए है ऐसे में भाजपा के जिन कर्णधारों पर आगामी विधानसभाओ को लेकर आमजनमानस में संजीदगी से विचार चल रहा है उसको लेकर कुछ लोगो की नींद न केवल हराम बताई जा रही है बल्कि सामाजिक ओर राजनीतिक बिसात पर उसके लिए मंथन भी अब अपने अस्तित्व में आ चुका है।

सहारनपुर: आगामी विधानसभा 2027 के चुनाव को लेकर भाजपा में चल रही उम्मीदवारों की होने वाली अग्निपरीक्षा ने मानो एक हलचल सी पैदा करने की तैयारी कर ली है, प्रदेश नेतृत्व द्वारा वर्तमान विधायको की गोपनीय रिकॉर्ड,उनकी कार्यप्रणाली ओर समाजिक स्तर पर उनके द्वारा सर्वधर्मो के बीच की नजदीकियां ओर किये गए कार्यो के लेखा जोखा पर मंथन शुरू होने की जानकारी सूत्रों द्वारा प्राप्त हो रही है। ऐसे में सामाजिक समरसता, विभिन्न वर्गों जिनमे व्यापारी, प्रबुद्ध नागरिक, वैश्य, ब्राह्मण, ठाकुर ओर अन्य बिरादरियों के बेहतर तालमेल का संगम भी इस बार एक विचित्रता लेकर आने को है, ऐसे में प्रश्न यही है कि क्या इव बार यदि प्रदेश नेतृत्व बदलाव करता है तो वह कौन कौन से चेहरे हो सकते है जिनकी राजनीतिक कुंडली लखनऊ स्तर से खंगाली जा रही है। मसलन राजनीति की मूल भावना सेवा, पार्टी के प्रति सक्रियता, निष्ठा, नीतियों को लेकर जनता में संवाद, ओर ईमानदारी, धरातल पर मोदी योगी के विकास मॉडल का जनता के बीच मे बखान, काफ़ी कुछ मायने रखता है, ऐसे में जनता भी अब अपने मूड में परिवर्तन करने की दिशा में अपनी नई पारी खेलने के लिये बेकरार लगती है। बात करे पूर्व सांसद राघव लखन पाल शर्मा वर्तमान में भाजपा राष्ट्रीय परिषद के पदाधिकारी, तीन बार विधायक के पद पर आसीन, भाजपा में वरिष्ठता का दर्जा, हँसमुख, निर्विवाद, निष्पक्ष कार्यशैली, जनता के बीच हर समय सक्रिय, सभी बिरादरियों में भरपूर स्नेह, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में एक स्वच्छ और निर्मल छवि, किसी से कोई वाद की भावना नही, ऐसे में पार्टी इनको लेकर भी संजीदा बताई जा रही है, वही संजय गर्ग वैश्य समाज का निष्पक्ष ओर निर्विवाद चेहर, पूर्व मंत्री, तीन बार के विधायक और अपनी विशिष्ट भाषा शैली के साथ जनता के बीच मे सुलभ, ऐसे में आगामी चुनाव में इनके लिए भी पार्टी में मंथन चलने की बाते सामने आ रही है, वही डॉ अजय सिंह वर्तमान में नगर निगम के महापौर, वाक्पटुता में इनका भी कोई सानी नही, मृदुलता, व्यवहारिकता ओर कार्यशीलता का एक संगम इनको लेकर भी अब लखनऊ स्तर पर मंथन होना शुरू हुआ है, वही पंजाबी समाज मे एक ओर चेहरा अमित गगनेजा जो पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष के साथ पंजाबी समाज और समाजिक कार्यो तथा पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ता स्वयं को मानते है, ऐसे में इनको भी इस बार लखनऊ में मंथन ओर चिंतन की परिधि में लाये जाने की सूचना प्राप्त हो रही है। अब प्रश्न है कि क्या आने वाले समय मे परवर्तन होंगे? यह आकलन आम जनता का है? वह इन सभी के लिये अपनी राय अवश्य दे, साथ ही बताये की क्यो आखिर एक ही बिरादरी को बिरादरीवाद में पिरो कर, आने वाले समय मे किसी को पार्टी और जनता क्यो चुनेगी, लेकिन इतना अवश्य है कि वर्तमान को छोड़कर भविष्य के लिए लगे प्रश्नचिन्ह में कौन फिट बैठेगा यह अवश्य बताने के लिए आपके सुझाव भी आमंत्रित है। यह भी अपेक्षित है कि कोई यदि अपने सुझाव एक जनप्रतिनिधि के चुनाव के दृष्टिगत रखते है तो यह एक सकारात्मक पहल होगी? क्योकि इस बार बिरादरी वाद नही, राजनीति के नाम पर व्यापार नही, बल्कि जनता के बीच उनके मुद्दों को को सुलझाने वाला ही सरदार होगा? मन मे कपट, वैमनस्य, राग, द्वेष ओर व्यक्तिगत दर्भावना रखने वाला नही। बहरहाल यह एक शुरुआत है आगामी विधानसभाओ को लेकर, अन्य विधान सभाओं को लेकर भी हम जनता की राय जानने का प्रयास करेंगे? यह एक प्रयास है इसे कोई अन्यथा न ले क्योकि राजनीति वयः दर्पण है जिसमे जगह जगह ओर हर गली, हर कोने में दर्पण लगे होते है जिनमे व्यक्ति को अपना अक्स दिखाई तो देता है लेकिन व्यक्ति देखना नही चाहता? आप से एक अनुरोध पांचवे प्रश्नचिन्ह पर आने वाले व्यक्ति के लिए भी आपके विचार आमंत्रित है।

रिपोर्ट कुलदीप शर्मा

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