मिशन 2027 के लिए कांग्रेस ने वेस्ट यूपी को सियासी तौर पर बेस्ट बनाने के लिए कमर कस ली है।
संगठन में बदलाव के क्रम में पार्टी ने अब अपने राष्ट्रीय सचिवों (यूपी के सह प्रभारियों) को जोन आवंटन कर दिए हैं।
इस आवंटन में जातिगत काम्बिनेशन का ख्याल रखा गया है। दरअसल वेस्ट यूपी में एक तरह से दो जोन कांग्रेस संगठन का क्षेत्र माने जाते हैं, जिसमें दलित और जाट समाज से जुड़े प्रभारियों को लगाया गया है।
सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस हाईकमान ने ऐसा करके जाट और दलित बहुल इस क्षेत्र को साधने की कोशिश की है।
यूपी से करीब पांच दशक से सत्ता से बाहर कांग्रेस की पूरी कोशिश वापसी की है। वह लाख जतन इसके लिए कर भी रही है। वह अकेले भी चुनावी रण में दम भर चुकी है और गठबंधन की बैसाखी भी लगा चुकी है। फिलहाल समाजवादी पार्टी के संग उसका गठबंधन लगभग तय है। लेकिन गठबंधन के साथ ही कांग्रेस की कोशिश अपने दम पर सियासी तौर पर मजबूत होने की है। इसके लिए उसने संगठन की ओवरहालिंग शुरू कर रखी है। सबसे पहले यूपी का प्रभारी बदलकर दलित राजेंद्र पाल गौतम को मैदान में उतारा है। उसके बाद यूपी के सह प्रभारी के तौर पर यहां लंबे वक्त से जमे लोगों को हटाकर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की पसंद के लोगों को सह प्रभारी तैनात किया है। यूपी में कांग्रेस का प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव होता है और सह प्रभारी राष्ट्रीय सचिव बनाए जाते हैं।

