उज्जैन: ‘पुजारियों की जेब सिल दो’ वाले बयान पर भड़का पुजारी महासंघ; दी पुतला दहन की चेतावनी
उज्जैन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंडलेश्वर के एक बयान ने तूल पकड़ लिया है। मंदिरों में दान की चोरी रोकने के लिए पुजारियों के कपड़ों (कुर्ते) में जेब न रखने और उनकी नियमित तलाशी लेने के सुझाव पर अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया है।
विवाद के मुख्य बिंदु:
संतों का क्या था बयान? अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि मंदिरों का पूरा दान जनहित में लगे, इसके लिए पुजारियों की वेशभूषा (कुर्ते) में जेब नहीं होनी चाहिए। उन्होंने हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर का उदाहरण भी दिया। वहीं, महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने पुजारियों और कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू करने और मंदिर में प्रवेश व निकास के समय मेटल डिटेक्टर से उनकी चेकिंग (तलाशी) करने की वकालत की।
पुजारी महासंघ का पलटवार: अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश पुजारी ने इन बयानों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने संतों की जानकारी पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि शैव (शिव) मंदिरों में पुजारी कुर्ता पहनते ही नहीं हैं।
‘पहले अपने अखाड़े संभालें’: महेश पुजारी ने संतों पर तंज कसते हुए कहा कि अखाड़ा परिषद को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने अखाड़ों की व्यवस्था देखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बगलामुखी मंदिर मामले में दान चोरी के आरोप ट्रस्टियों और कर्मचारियों पर लगे थे, लेकिन बेवजह पुजारियों को बदनाम किया जा रहा है।
पुतला दहन की चेतावनी: महासंघ ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि संतों ने भविष्य में पुजारियों के खिलाफ इस तरह के अपमानजनक बयान दिए, तो पुजारी महासंघ रविंद्र पुरी महाराज का पुतला जलाकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करेगा।

