उत्तराखंड भाजपा में एक बार फिर क्षेत्रीय संतुलन और अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वरिष्ठ भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी द्वारा सार्वजनिक मंच से गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी पर की गई टिप्पणी को राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से शांत दिखाई दे रहे कोश्यारी का अचानक मुखर होना केवल एक सामान्य बयान नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा के भीतर भविष्य के नेतृत्व और क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसद बनने के बाद अनिल बलूनी ने गढ़वाल क्षेत्र, विशेषकर पौड़ी में विकास कार्यों, संगठनात्मक सक्रियता और जनसंपर्क के जरिए मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई है। ऐसे में उनके खिलाफ लगातार सार्वजनिक बयानबाजी को कुछ लोग गढ़वाल के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं।उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल और कुमाऊँ का संतुलन हमेशा संवेदनशील विषय रहा है। इससे पहले भी नेतृत्व को लेकर कई बार क्षेत्रीय खींचतान सामने आ चुकी है। राजनीतिक जानकारों को याद है कि भुवन चंद्र खंडूरी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भी कोश्यारी खुलकर आक्रामक रुख में नजर आए थे।अब सवाल यह उठ रहा है कि भाजपा नेतृत्व इन बयानों को केवल व्यक्तिगत मतभेद मानेगा या फिर संगठन के भीतर उभर रहे बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में गंभीरता से लेगा।

