वाराणसी / छत्तीसगढ़, 14.09.26 – ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का 102वां प्राकट्योत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया
ज्योतिष एवं द्वारका शारदा द्वयपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का 102वां प्राकट्योत्सव काशी, छत्तीसगढ़, ज्योतिर्मठ सहित देश-विदेश में मनाया गया।
श्री विद्या मठ, काशी में: ब्रह्मचारी परमात्मानंद जी की अगुवाई में वैदिक आचार्यों – मणि झा, ओमप्रकाश पाण्डेय, विनय भूषण तिवारी, शिवाकांत मिश्रा, अनिरुद्ध मिश्रा द्वारा चरण पादुका पूजन एवं रुद्राभिषेक, मोदक अर्चन, 108 वैदिक विद्यार्थियों द्वारा चतुर्वेद पारायण, भजन-कीर्तन एवं भंडारा।
मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया: ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, दो बार जेल गए, अकेले दम पर MP में पूरा गांव अंग्रेजों से खाली कराया। राम मंदिर आंदोलन में भी जेल गए। उनके आदेश से ही वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने 25 वर्ष संघर्ष कर राम जन्मभूमि का फैसला हिंदुओं के पक्ष में करवाया, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाया, रामसेतु को बचाया और लाखों वनवासी-आदिवासियों को सनातन में वापस लाए।
वर्तमान में ज्योतिष्पीठाधीश्वर का चातुर्मास्य व्रत सपाद लाखेश्वर धाम, सलधा, बेमेतरा (छत्तीसगढ़) में चल रहा है।

