कॉल डिटेल (CDR) खुली तो पता चला कि साहबों के दिल के तार अपराधियों से सीधे जुड़े थे
मोबाइल में ऑडियो मिले हैं जहाँ पुलिस वाले अपराधियों को ‘डिजास्टर मैनेजमेंट’ सिखा रहे थे, धन्य है वह पुलिसिंग, जहाँ दरोगा जी तस्करों को पकड़ते नहीं, बल्कि उन्हें ‘बिजनेस बढ़ाने’ की ट्यूशन देते हैं, साहब, जब बाड़ ही खेत को चिलम में भरकर पीने लगे, तो खाकी की साख सिर्फ धुएं की तरह ही उड़ेगी
“बेटा, माल हटा लो, फूफा आ रहे हैं “
कानपुर पुलिस की ‘दरियादिली’ देखकर आंखों में आंसू आ गए
अब तक सुना था कि पुलिस अपराधियों का ‘नेटवर्क’ तोड़ती है, पर यहाँ तो पुलिस वालों ने तस्करों के साथ मिलकर अपना ही ‘बिज़नेस नेटवर्क’ बना लिया
एक दरोगा और तीन हेड कांस्टेबल साहब तो बाकायदा गां जा – च र स के ‘कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव’ बन गए थे
जब कमिश्नर साहब छापेमारी करने निकले, तो उससे पहले ही साहबों ने फोन करके तस्करों को ‘सेफ्टी टिप्स’ दे दिए, ‘बेटा, माल हटा लो, फूफा आ रहे हैं!’ ये पुलिसकर्मी नहीं हैं, ये तो ‘तस्करी के कोच’ हैं।
कॉल डिटेल (CDR) खुली तो पता चला कि साहबों के दिल के तार अपराधियों से सीधे जुड़े थे
मोबाइल में ऑडियो मिले हैं जहाँ पुलिस वाले अपराधियों को ‘डिजास्टर मैनेजमेंट’ सिखा रहे थे, धन्य है वह पुलिसिंग, जहाँ दरोगा जी तस्करों को पकड़ते नहीं, बल्कि उन्हें ‘बिजनेस बढ़ाने’ की ट्यूशन देते हैं, साहब, जब बाड़ ही खेत को चिलम में भरकर पीने लगे, तो खाकी की साख सिर्फ धुएं की तरह ही उड़ेगी

