बुज़ुर्ग माँ को नदी में फेंकने का आरोप, बेटे की क्रूरता ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
जिस माँ ने पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी माँ को बुढ़ापे में सहारा देने के बजाय मौत के हवाले कर देना इंसानियत पर सबसे बड़ा धब्बा है।
ऐसे कृत्य के लिए कोई भी सज़ा कम ही होगी। जो बेटा माँ-बाप के एहसान का क़र्ज़ नहीं समझ सका, उसे इस दुनिया में जीने का नैतिक अधिकार नहीं है।

