पूर्व शिक्षा मंत्री निशांत जी हो या फिर हर्षवर्धन जी या फिर रविशंकर प्रसाद जी सभी का इस्तीफा स्वीकार किया गया परंतु धर्मेंद्र प्रधान की स्थिति पर स्वीकार क्यों नहीं किया जा रहा है यह सवाल लगातार जनता के बीच में
पता नहीं प्रधान जी के पास ऐसी कौन सी कस्तूरी है जिसकी आलौकिक सुगंध के मोह मैं साहेब हजारों छात्रों का लहू बहाने को तो तैयार हैं परन्तु प्रधान जी को हटाने को तैयार नहीं…?
फेरबदल की एक लंबी सार्वजनिक लिस्ट है जिसमें अनेकों कद्दावर नेताओं के मंत्रालयों मै या तो फेरबदल किया गया या बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
डॉ रमेश पोखरियाल निशंक याद हैं आपको,
केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे, प्रधान से पहले निशंक जी के पास ही ये विभाग था,
पोर्टफोलियो देखिए,,,
PHD (डॉक्टरेट) थे, शिक्षक भी रहे, 40+ पुस्तकें लिखीं, साहित्यिक पुरस्कार विजेता हैं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे, फिर भी हटा दिए गए।
क्यों…..इनके पास बस वो कस्तूरी नहीं थी जो प्रधान जी के पास थी।
दरअसल जिस भाजपा के हम प्रसंशक है वो सर उठाकर बात करने वाले लोग थे, अब क्योंकि साहेब को सलाहकारी पसंद नहीं तो उस पीढ़ी को चुन चुन कर ठिकाने लगा कर जी हुजूरों की ताजपोशी की जा रही है जो समय आने पर जनरल डायर भी बनना पड़े तो हिचकिचाए नहीं।
जल्द ही आप देखेंगे कि नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे योगी आदित्यनाथ इतिहास पुरुष हो जाएंगे।
विशेषकर योगी जी के लिए तैयारी पूर्ण हो चुकी है।
चौंकिए मत,

