हरिद्वार, 25 मई। ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी गोलीकांड प्रकरण में आज एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब आरोपी अतुल चौहान को माननीय तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हरिद्वार द्वारा जमानत प्रदान कर दी गई।
उल्लेखनीय है कि यह जमानत प्रार्थना पत्र प्रारंभ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हरिद्वार के समक्ष विचाराधीन था, किन्तु इस वाद में पूर्व में उनके द्वारा पारित एक आदेश को माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने के उपरांत संबंधित न्यायाधीश द्वारा स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया गया था। इसके बाद प्रकरण को तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित किया गया।
ज्ञातव्य है कि दिनांक 28 जनवरी 2026 को ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी, तहसील एवं जनपद हरिद्वार में तथाकथित “उषा टाउनशिप” के नाम पर अधिग्रहित भूमि की प्रशासनिक पैमाइश की कार्यवाही प्रस्तावित थी। यह पैमाइश सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा की गई शिकायतों के उपरांत कराई जा रही थी, जिनमें आरोप लगाया गया था कि अतिक्रमण के साथ-साथ उक्त टाउनशिप हेतु भूमि का एक हिस्सा अवैध रूप से बागों की कटाई कर प्राप्त किया गया है।
घटना वाले दिन, जब पैमाइश की कार्यवाही प्रारंभ होने से पूर्व ही मौके पर पटवारी एवं तहसीलदार उपस्थित थे, तभी विपक्षी पक्ष के अमित चौहान एवं उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए अतुल चौहान एवं उनके साथियों पर लाठी-डंडों तथा अन्य हथियारों से हमला कर दिया गया। इसके पश्चात दोनों पक्षों में मारपीट एवं फायरिंग की घटना हुई। आरोप है कि इसी दौरान अतुल चौहान ने आत्मरक्षा में अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायर किया तथा बाद में स्वयं थाना कनखल पहुंचकर अपनी पिस्टल सहित आत्मसमर्पण कर दिया।
बताया जाता है कि घटना के तत्काल बाद एक प्रत्यक्षदर्शी द्वारा दी गई प्रथम शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। बाद में अमित चौहान की ओर से दी गई तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें छह व्यक्तियों को नामजद किया गया। जांच के दौरान एक व्यक्ति का नाम हटाया गया, दूसरे को डिस्चार्ज कर दिया गया तथा तीसरे व्यक्ति को अग्रिम जमानत प्राप्त हो चुकी है। अब ताजा घटनाक्रम में अतुल चौहान को भी जमानत मिल गई है।
प्रकरण में पुलिस द्वारा अतुल चौहान के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, जबकि जांच अभी भी जारी है। वहीं दूसरी ओर, अतुल चौहान की पत्नी द्वारा अमित चौहान एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध दी गई शिकायत की जांच भी प्रचलित बताई जा रही है।
इस बीच, माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने दिनांक 11 मार्च 2026 को हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की 83वीं बोर्ड बैठक में उषा टाउनशिप को दी गई अनुमतियों पर स्थगन आदेश पारित किया था। प्रशासनिक पैमाइश में यह भी सामने आया कि उषा टाउनशिप कथित स्वीकृत क्षेत्रफल से लगभग साढे तीन गुना अधिक भूमि पर कब्जे में पाई गई है। मामले में प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई अभी अपेक्षित है।
उधर, अतुल चौहान के परिजनों ने जमानत मिलने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि “न्याय प्रतिष्ठित हुआ है।” परिवार ने कहा कि वे अपने अधिकारों एवं उपलब्ध सभी वैधानिक उपायों का आगे भी सहारा लेते रहेंगे।

