मनोज ठाकुर
स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद विषय पर ऋषिकुल परिसर में संगोष्ठी आयोजित
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, आयुष विभाग उत्तराखंड सरकार एवं उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला, देहरादून के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर निर्धारित थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद (Ayurveda for a Healthier Tomorrow)” के अंतर्गत मंगलवार को ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज, हरिद्वार के मदन मोहन मालवीय प्रेक्षागृह में संगोष्ठी एवं विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, ऋषिकुल परिसर के परिसर निदेशक प्रोफेसर ओ.पी. सिंह सहित प्रोफेसर खेम चंद्र शर्मा, प्रोफेसर अजय गुप्ता, प्रोफेसर रूबी रानी अग्रवाल एवं अन्य वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा भगवान धन्वंतरि के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर धन्वंतरि वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत ऋषिकुल परिसर के विभिन्न विभागों के स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं के लिए पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता का मूल्यांकन प्रोफेसर सीमा जोशी, विभागाध्यक्ष शरीर क्रिया विभाग, प्रोफेसर गुंजन शर्मा, विभागाध्यक्ष शालाक्य तंत्र विभाग, डॉ. शोभित कुमार, विभागाध्यक्ष स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग तथा डॉ. प्रवेश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, पंचकर्म विभाग द्वारा किया गया।
इस अवसर पर परिसर निदेशक प्रोफेसर ओ.पी. सिंह ने राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार-विहार एवं रोगों की रोकथाम पर आधारित समग्र स्वास्थ्य विज्ञान है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली और आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच आयुर्वेद के सिद्धांतों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
प्रोफेसर खेमचंद शर्मा विभागाध्यक्ष रसशास्त्र विभाग, ने कहा कि आयुर्वेद की मूल अवधारणा व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखने और रोग की उत्पत्ति को रोकने पर आधारित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में निवारक एवं समग्र स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में आयुर्वेद की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रमाणों के साथ आगे बढ़ाने से स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
प्रोफेसर रूबी रानी अग्रवाल विभाग अध्यक्ष रोगनिदान,प्रोफेसर अजय गुप्ता, विभागाध्यक्ष शल्य तंत्र विभाग, तथा प्रोफेसर सीमा जोशी, विभागाध्यक्ष शरीर क्रिया विभाग, ने भी राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को आयुर्वेद के सिद्धांतों के वैज्ञानिक अध्ययन, अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य में उनके प्रभावी उपयोग के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा आयुर्वेद के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जन-जागरूकता के लिए विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. अंजली वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, स्त्री एवं प्रसूति विभाग तथा डॉ. श्वेता शुक्ला, असिस्टेंट प्रोफेसर, काय चिकित्सा विभाग द्वारा उत्साहपूर्वक किया गया। अंत में प्रोफेसर संजय त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर कीर्ति वर्मा, प्रोफेसर सुरेश चौबे, प्रोफेसर संजय सिंह, प्रोफेसर रमेश चंद्र तिवारी, डॉ. भावना मित्तल, डॉ. वेद भूषण शर्मा, डॉ. पारुल शर्मा, प्रो. शुचि मित्रा, डॉ. महेश चंद्रा, डॉ. प्रियंका शर्मा, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. यादवेंद्र यादव सहित ऋषिकुल परिसर के अनेक शिक्षक, स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।

