Ganga News 24 | दिल्ली
लोक सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री जी.एम.सी. बालयोगी जी की जयंती पर संविधान सदन में श्रद्धांजलि
लोक सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री जी.एम.सी. बालयोगी जी की जयंती के अवसर पर आज संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उनका स्मरण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
लोक सभा अध्यक्ष ने बालयोगी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर कहा गया कि बालयोगी जी संसदीय गरिमा, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की एक प्रेरक विरासत हैं।
बालयोगी जी का सार्वजनिक जीवन:
श्री बालयोगी जी का जीवन संघर्ष, शिक्षा और निरंतर कर्मशीलता की यात्रा रहा। स्थानीय निकाय से लेकर आंध्र प्रदेश विधानसभा और फिर संसद तक का सफर तय किया। 1991 में पहली बार लोक सभा के लिए निर्वाचित हुए। 1998 में वे लोक सभा के सबसे युवा अध्यक्ष बने, उस समय सदन में लगभग 40 राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व था।
चुनौतीपूर्ण राजनीतिक परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी कार्यशैली से सभी दलों के बीच विश्वास कायम किया। 1999 में दूसरी बार सर्वसम्मति से लोक सभा अध्यक्ष निर्वाचित हुए, जो सदन के उनके प्रति व्यापक विश्वास को दर्शाता है।
संसदीय विरासत:
बालयोगी जी मानते थे कि अध्यक्ष का पहला दायित्व सदन की गरिमा बनाए रखना है। उनके प्रयासों से:
- Rules of Procedure में Well में आकर व्यवधान करने पर automatic suspension का प्रावधान जोड़ा गया
- 25 नवंबर 2001 को Discipline and Decorum पर ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित
- लोक सभा की पहली Ethics Committee गठित करने का श्रेय
- नए सांसदों/विधायकों के Orientation Programmes को प्रभावी बनाया
आज उन्हें याद करना उन मूल्यों को याद करना है जो स्वस्थ संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद हैं।

