बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। BCI के सदस्य और को-चेयरमैन वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने 22 अगस्त को मनन मिश्रा को छह पन्नों का पत्र लिखकर उनके पद से इस्तीफा देने की मांग की है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। BCI के सदस्य और को-चेयरमैन वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने 22 अगस्त को मनन मिश्रा को छह पन्नों का पत्र लिखकर उनके पद से इस्तीफा देने की मांग की है।

रेड्डी ने कहा कि BCI संसद के कानून से गठित एक वैधानिक संस्था है और इसे किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति की तरह नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने परिषद के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

रेड्डी ने अपने पत्र में BCI के कामकाज को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि BCI के करीब 150 करोड़ रुपये के फंड को BCI ट्रस्ट से PEARL-First नाम के एक नए ट्रस्ट में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके अलावा उन्होंने परिषद में परिवार के सदस्यों और व्यक्तिगत रूप से जुड़े लोगों की नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं होने का भी आरोप लगाया है।

रेड्डी ने लॉ कॉलेजों से कथित तौर पर ट्रस्ट के लिए धन लिए जाने और NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों के खिलाफ हालिया कार्रवाई को भी अपने पत्र में इस्तीफे की मांग का आधार बताया है। उनका कहना है कि इन घटनाओं और परिषद के मौजूदा कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

BCI में स्टाफ की नियुक्तियों को लेकर भी रेड्डी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि परिषद के कर्मचारियों की मौजूदा सूची और उनके बैकग्राउंड की समीक्षा के दौरान उन्हें एक ऐसा पैटर्न दिखाई दिया, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। रेड्डी के मुताबिक, BCI में बड़ी संख्या में ऐसे लोग कार्यरत हैं जिनके मनन मिश्रा से व्यक्तिगत संबंध हैं। इनमें कुछ परिवार के सदस्य और रिश्तेदार भी शामिल हैं।

रेड्डी ने दावा किया कि BCI के रिकॉर्ड में इन नियुक्तियों से संबंधित न तो कोई सार्वजनिक विज्ञापन मिला, न चयन समिति की कार्यवाही और न ही उम्मीदवारों की तुलनात्मक मेरिट लिस्ट। उन्होंने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, रेड्डी ने मनन मिश्रा से BCI चेयरमैन पद से तत्काल इस्तीफा देने को कहा है। उन्होंने अधिकतम 15 दिनों के भीतर इस्तीफा देने की मांग रखी है। रेड्डी का कहना है कि BCI देशभर के लाखों अधिवक्ताओं के योगदान से संचालित संस्था है और इसके संसाधनों तथा अधिकारों का इस्तेमाल पूरे बार के हित में होना चाहिए।

रेड्डी ने पत्र में यह भी कहा कि वह करीब एक दशक से मनन मिश्रा के साथ परिषद में काम कर चुके हैं। बैठकों और परिषद के कामकाज के दौरान उन्होंने जो कुछ देखा, उसके आधार पर उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि BCI की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब वह चुप नहीं रह सकते।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *