पतंजलि की पूरी कहानी जो आज विश्व ब्रांड बन चुकी है

पतंजलि की पूरी कहानी – उदय और पतन
Patanjali’s Rise & Fall: The Untold Story of Baba Ramdev | @HiddenOpsIndia1 पर आधारित

1. शुरुआत – रामकृष्ण यादव से बाबा रामदेव तक

बाबा रामदेव का असली नाम रामकृष्ण यादव है। जन्म 25 दिसंबर 1965 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अली सैयदपुर गांव में एक गरीब किसान परिवार में हुआ। पिता रामनिवास यादव, मां गुलाबो देवी।

बचपन में ही उन्हें चेहरे पर लकवा / पक्षाघात हुआ। शरीर का एक हिस्सा कमजोर हो गया। डॉक्टरों ने कहा था कि अब ऐसे ही जीना पड़ेगा। गरीबी इतनी थी कि फर्श पर सोना पड़ता था, पुराने टायर की चप्पल पहनकर स्कूल जाते थे। e1f2

इसी बीमारी ने उन्हें योग की तरफ मोड़ा। उन्होंने खानपुर के गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न और योगाचार्य बलदेव जी से संस्कृत और योग की शिक्षा ली। बाद में हिमालय में साधना की और हरिद्वार आ गए। गुरु शंकरदेव महाराज से संन्यास दीक्षा ली और रामकृष्ण से बन गए बाबा रामदेव। 68a4

2. आचार्य बालकृष्ण से दोस्ती – पतंजलि की नींव

गुरुकुल में ही उनकी मुलाकात आचार्य बालकृष्ण से हुई। दोनों ने मिलकर 1995 में दिव्य योग ट्रस्ट शुरू किया।

1995 से 1998 तक बाबा रामदेव बाजार से औषधि और मसाले खरीदकर दवाई बनाते थे और लोगों को मुफ्त बांटते थे। वह लोगों को आयुर्वेद की तरफ ले जाना चाहते थे। ec13

कहानी का सबसे चर्चित हिस्सा यही है – 1995 में पतंजलि का कंपनी के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ, फीस थी सिर्फ 13,000 रुपये, लेकिन उनके पास थे सिर्फ 3,500 रुपये। बाकी पैसे दोस्तों से उधार लेकर जमा किए। 68a4

साल 2002 में गुरु शंकरदेव की तबीयत खराब होने पर बाबा रामदेव दिव्य योग ट्रस्ट का चेहरा बने, बालकृष्ण ने फाइनेंस संभाला। 6325

3. टीवी से घर-घर पहुंचे रामदेव

रामदेव के आने से पहले भारत में योग और आयुर्वेद इतने लोकप्रिय नहीं थे। भारत के व्यावसायिक बाज़ार में इनका प्रभावपूर्ण ढंग से विकास नहीं हो पाया था – यही बात वीडियो के कमेंट में भी लिखी है।

2003 में आस्था टीवी पर उनका योग शो शुरू हुआ। सुबह-सुबह घर-घर में बाबा रामदेव योग सिखाते दिखने लगे। लाखों लोग योग शिविरों में आने लगे।

यही उनकी सबसे बड़ी मार्केटिंग थी – बिना पैसे खर्च किए, लोगों का भरोसा जीत लिया। पतंजलि की असल लॉन्चिंग से पहले ही बहुत बड़ी मार्केटिंग हो चुकी थी। cc1d

4. पतंजलि का उदय – 2006 से 2017

2006 में हरिद्वार में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की स्थापना हुई। मालिकाना हक आचार्य बालकृष्ण के पास – करीब 94-98% शेयर, बाबा रामदेव बने ब्रांड का चेहरा। बाबा रामदेव के पास पतंजलि आयुर्वेद में व्यक्तिगत शेयर नहीं हैं। b0d2

फॉर्मूला सीधा था:

  • स्वदेशी – विदेशी कंपनियों के खिलाफ भारतीय ब्रांड
  • सस्ता और शुद्ध – कम दाम, आयुर्वेदिक होने का दावा
  • सुबह से शाम तक का सामान – आटा, घी, शहद, दंत कांति टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू, नूडल्स तक

2011-12 में टर्नओवर सिर्फ ₹450 करोड़ था, 2016-17 में पहुंच गया ₹10,000 करोड़ से ज्यादा। b0d2

सिर्फ दंत कांति ने 2015-16 में ₹450 करोड़ की बिक्री की। 2015 में फ्यूचर ग्रुप / बिग बाजार से टाई-अप के बाद पतंजलि 250 शहरों तक पहुंच गई। cc1d

कोलगेट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियां डर गईं। रामदेव ने कहा था – “टर्नओवर के आंकड़े मल्टीनेशनल कंपनियों को कपालभाति करवा देंगे।”

5. पतन की शुरुआत – तेजी ही बनी कमजोरी

2017-18 में ही टर्नओवर 10% गिरकर ₹8,100 करोड़ रह गया। 9 महीने में सिर्फ ₹4,700 करोड़ की बिक्री का अनुमान आया। b63c

कारण:

  1. क्वालिटी में गड़बड़ी – तेजी से फैलने पर कई प्रोडक्ट क्वालिटी टेस्ट में फेल हुए, FSSAI और आयुष मंत्रालय से नोटिस मिले
  2. नोटबंदी और GST – 2016 की नोटबंदी और 2017 की GST ने डिस्ट्रीब्यूशन को हिला दिया
  3. डिस्ट्रीब्यूशन की दिक्कत – 3,500 डिस्ट्रीब्यूटर, 47,000 काउंटर, लेकिन सप्लाई और स्टॉक में लगातार दिक्कत
  4. भ्रामक विज्ञापन – डायबिटीज, कैंसर, बीपी जैसी बीमारियों को ठीक करने के दावे वाले विज्ञापन

6. कोरोनिल और सुप्रीम कोर्ट – सबसे बड़ा झटका

2020 में कोरोनिल को इम्युनिटी बूस्टर के रूप में लॉन्च किया गया। शुरुआती दावों पर विवाद हुआ, कई राज्यों में रोक लगी, कानूनी चुनौतियां आईं। एलोपैथी पर दिए बयानों से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से टकराव हुआ। 98bc

आखिरकार मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। भ्रामक विज्ञापनों पर बैन लगा, प्रोडक्ट लाइसेंस सस्पेंड हुए। रामदेव और बालकृष्ण को बार-बार कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी। उत्तराखंड सरकार ने भी स्वसारी गोल्ड, दृष्टि आई ड्रॉप, ब्रोंकोम, लिवोग्रिट, मधुग्रिट, मुक्ता वटी समेत कई दवाओं पर रोक लगाई।

यही वो मोड़ था, जिसे लोग पतंजलि का “पतन” कहते हैं।

7. वापसी – रुचि सोया से पतंजलि फूड्स

पतंजलि ने हार नहीं मानी। डूब रही कंपनी रुचि सोया को खरीदा और उसे पतंजलि फूड्स बना दिया। अब कंपनी खाने के तेल, सोया चंक, बिस्किट, शहद, मिलेट फूड्स में बड़ी खिलाड़ी है।

आज पतंजलि ग्रुप का टर्नओवर ₹40,000-45,000 करोड़ के आसपास बताया जाता है। पतंजलि आयुर्वेद ने FY25 में करीब ₹5,860 करोड़ का रेवेन्यू किया। अब ग्रुप अस्पताल, मेगा फूड पार्क, इंश्योरेंस और इंटरनेशनल पार्टनरशिप में भी जा रहा है। रामदेव का लक्ष्य है 2028 तक ₹1 लाख करोड़ टर्नओवर। 98bc

निष्कर्ष

पतंजलि की कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है। ये कहानी है –
एक बीमार, गरीब बच्चे के योग गुरु बनने की,
₹3,500 से ₹10,000 करोड़ का साम्राज्य बनाने की,
और फिर तेजी, दावों और विवादों में फंसकर गिरने और फिर संभलने की


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