पत्रकार से मारपीट और अवैध हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त

bignews ⚖️ पत्रकार से मारपीट और अवैध हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त

मुरैना एसपी को 3 महीने में निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

✍️ पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती है। यदि कोई पत्रकार खबर की पड़ताल करते समय कथित रूप से मारपीट, अवैध हिरासत और धमकियों का शिकार होता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के राज से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाता है। ऐसे ही एक मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुरैना पुलिस अधीक्षक (SP) को तीन महीने के भीतर निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता पत्रकार ओमकार गुर्जर के अनुसार, 28 मई 2026 को वे खबर कवरेज के सिलसिले में अंबाह थाने पहुंचे थे। वहां कथित रूप से थाना परिसर में चल रहे निर्माण कार्य में चंबल नदी से जब्त की गई अवैध रेत का उपयोग होता दिखाई दिया।

आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर प्रज्ञाशील गौतम के कहने पर उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया, लेकिन बाद में इसकी शिकायत थाना प्रभारी वीरेश कुशवाह से कर दी गई।

पत्रकार का आरोप है कि इसके बाद उनका मोबाइल छीन लिया गया, फोटो और वीडियो डिलीट कर दिए गए तथा थाने के कमरे में ले जाकर उनके साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं, उन्हें कथित रूप से अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और टीन शेड में प्लास्टिक पाइप वाले डंडों से पीटा गया।

पीड़ित का यह भी आरोप है कि शिकायत करने के बाद उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर जीवनभर कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगवाने की धमकियां दी गईं।

मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने के बाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।

📌 खास बातें

🔹 मामला: पत्रकार से कथित मारपीट और अवैध हिरासत
🔹 स्थान: अंबाह थाना, जिला मुरैना (मध्यप्रदेश)
🔹 पीड़ित: पत्रकार ओमकार गुर्जर
🔹 आरोप: मोबाइल छीनना, वीडियो डिलीट करना, मारपीट, अवैध हिरासत और धमकी
🔹 हाईकोर्ट का आदेश: मुरैना एसपी 3 महीने में निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट पेश करें
🔹 महत्व: मामला प्रेस की स्वतंत्रता, पुलिस जवाबदेही और मानवाधिकार से जुड़ा

🗣️ आपका क्या कहना है?

क्या खबर कवरेज के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और कड़े तंत्र की आवश्यकता है? अपनी राय शालीन भाषा में कमेंट करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *