मनोज ठाकुर
मातृ सदन में स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी की 16वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक सम्पन्न
हरिद्वार, 13 जून 2026। गंगा, पर्यावरण एवं जनहित के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देने वाले तपस्वी संत स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी की 16वीं पुण्यतिथि आज मातृ सदन, हरिद्वार में श्रद्धा, संकल्प एवं जनजागरण के वातावरण में सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम में देशभर से पधारे संत-महात्माओं, पर्यावरण चिन्तकों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों, किसान प्रतिनिधियों, मीडिया कर्मियों एवं चिंतित नागरिकों ने सहभागिता कर स्वामी निगमानन्द जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी के समाधि स्थल व चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। तत्पश्चात् मातृ सदन के परमाध्यक्ष परम पूज्य श्री गुरुदेव स्वामी शिवानन्द जी महाराज ने अपने उद्बोधन में स्वामी निगमानन्द जी के तप, त्याग एवं गंगा रक्षा हेतु उनके अद्वितीय बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि आज भी गंगा, हिमालय एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए उसी आत्मबल, सत्यनिष्ठा और तपश्चर्या की आवश्यकता है जिसका उदाहरण स्वामी निगमानन्द जी ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के विशेष रूप से उपस्थित आचार्य बालकृष्ण जी (पतंजलि योगपीठ) ने स्वामी निगमानन्द जी एवं गंगा संरक्षण आंदोलन के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए घोषणा की कि स्वामी निगमानन्द जी तथा स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द (प्रो. जी.डी. अग्रवाल) जी की स्मृति में मातृ सदन में एक भव्य समाधि स्थल का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दिशा में कार्य प्रारम्भ हो चुका है तथा इसे शीघ्र ही पूर्ण कर श्रद्धालुओं एवं पर्यावरण प्रेमियों के लिए समर्पित किया जाएगा।
कार्यक्रम में प्रख्यात विद्वान डॉ. भोला झा जी, सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री निलय उपाध्याय जी, पर्यावरण एवं सामाजिक विषयों के चिंतक कैप्टन राकेश ध्यानी जी, डॉ. विजय वर्मा जी, स्वामी केशवानन्द जी, स्वामी देवाश्रम जी, स्वामी करणगिरि जी सहित अनेक संतों एवं विचारकों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने स्वामी निगमानन्द जी के बलिदान को केवल एक स्मृति नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए गंगा, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हेतु जनसहभागिता बढ़ाने का आह्वान किया।

वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि गंगा एवं हिमालयी पारिस्थितिकी पर बढ़ते खनन, अवैज्ञानिक विकास परियोजनाओं तथा पर्यावरणीय अवहेलना के कारण गंभीर संकट उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी निगमानन्द जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज के नैतिक जागरण एवं जनसंकल्प से संभव है।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, गंगा की अविरलता-निर्मलता, हिमालय संरक्षण तथा वर्तमान विकास नीतियों के प्रभावों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिभागियों ने स्वामी निगमानन्द जी एवं स्वामी सानन्द जी द्वारा प्रारम्भ किए गए जनआंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
अंत में उपस्थित जनसमूह ने स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी के स्मरण में पुनः श्रद्धांजलि अर्पित की तथा गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
मातृ सदन, हरिद्वार

