वृंदावन की गलियों में बांके बिहारी के दर्शन करने आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। बरसों से बंदरों के आतंक से लोग परेशान थे। चश्मा और मोबाइल छीने जाने से डरते थे। अब उससे मुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

वृंदावन की गलियों में बांके बिहारी के दर्शन करने आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। बरसों से बंदरों के आतंक से लोग परेशान थे। चश्मा और मोबाइल छीने जाने से डरते थे। अब उससे मुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के शत्रुक और उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के बाद मथुरा की जिलाधिकारी सीपी सिंह की अगुवाई में एक ऐसा ऐतिहासिक और समन्वित एक्शन प्लान तैयार किया गया है, जिसे जमीन पर काम करना भी शुरू कर दिया है। इस कॉर्डिंनेट एक्शन प्लान के द्वारा भक्तों के इस बड़े दर्द को समझते हुए जिला प्रशासन ने बंदरों के सुरक्षित रेस्क्यू और पुनर्वास की पूरी क्रोनोलॉजी तय कर दी है।

उत्तर प्रदेश कैडर के 2012 बैच के आईएएस अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह का जन्म 7 अगस्त 1970 को हुआ था। चंद्र प्रकाश सिंह वर्तमान में मथुरा जिले में जिलाधिकारी के पद पर सेवा दे रहे हैं। इससे पहले भी गाजियाबाद नगर निगम में नगर आयुक्त के पद पर रहे। उनके नेतृत्व में गाजियाबाद को कई पुरस्कार प्राप्त हुए, जिनमें स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में त्रिसिखाया कचरा मुक्त शहर पुरस्कार और स्वच्छ शहर पुरस्कार, साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में भारत का सबसे तेजी से प्रगति करने वाला शहर पुरस्कार भी शामिल है। वह कासगंज में जिलाधिकारी के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। साथ ही बुलंदशहर में एक लंबे समय तक जिलाधिकारी के रूप में सेवारत रहे हैं और वहां भी कई ऐतिहासिक कार्य के चलते शासन से पुरस्कृत हो चुके हैं।

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