नगर निगम से कौड़ियों के भाव में लीज हुई है और किराए पर मोटी रकम वसूली कर रहे हैं
मनोज ठाकुर
हरिद्वार नगर निगम में एक बड़ी लीज से जुड़े प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
राजनीति के चक्कर में नगर निगम को हो रहा है राजस्व का नुकसान लीज खत्म होने के बाद बहुत लोग बैठे हैं कब्जा करो लीज छोड़ने को तैयार नहीं है कब्ज धारी
हरिद्वार नगर निगम की लीज पर दी गई संपत्ति क़ी समय अवधि समाप्त होने के बाद भी नगर निगम संपत्ति को खाली नहीं करा पा रहा है कीमती जमीन पर कब्जा किया हुआ है किराए के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है परंतु नगर निगम प्रशासन मौन बैठा है जिसकी शिकायत लगातार हमारे द्वारा की जा रही है
लीज समाप्त होने के बाद उसको दोबारा से लीज छोड़ दी जाए या आज के रेट पर उसकी संपत्ति प्लीज बनाकर उससे राजस्व वसूला जाए ताकि नगर निगम की कुछ कमाई हो सके
सूत्रों के अनुसार, लीज की अवधि बढ़ाने के समर्थन में माहौल बनाने के लिए कुछ पार्षदों को कथित तौर पर ₹20-20 हजार तक का ऑफर दिए जाने की चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि इस पूरे प्रयास की जिम्मेदारी एक पार्षद को सौंपी गई है, जो विभिन्न पार्षदों से संपर्क कर रहे हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ पार्षदों ने इस कथित प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया और इसकी जानकारी अन्य लोगों तक पहुंचाई, जबकि कुछ पार्षदों द्वारा इस ऑफर को स्वीकार किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।नगर निगम के राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि जब लीज अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव सदन में आएगा, तब कितने पार्षद इसके समर्थन में खड़े होंगे और कितने इसका विरोध करेंगे। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें टिकी हैं / देखना होगा कि नगर निगम बोर्ड बैठक में किस तरीके से काम करता है या अंडर प्रेशर होकर संपत्ति लीज पर क्या निर्णय लेती है!

