नेपाल के सातों प्रांतों में हिंदू राष्ट्र की मांग जोर पकड़ती जा रही है।

11 महीने पहले सत्ता के विरुद्ध जेन-जी की अभूतपूर्व क्रांति देखने वाला नेपाल कुछ समय शांत रहने के बाद एक बार फिर असहज है। इस बार मुद्दा धर्मनिरपेक्षता बनाम हिंदू राष्ट्र है।

नेपाल के सातों प्रांतों में हिंदू राष्ट्र की मांग जोर पकड़ती जा रही है।

बागमती प्रांत के काठमांडू से हिंदू राष्ट्र के लिए बड़ा जनाधार जुटाने को जिस हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत हुई है, उसकी जड़ कोशी प्रांत के सुनसरी जिले से जुड़ती है, जो हाल ही में सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आया था।

हिंसात्मक घटनाएं बढ़ने और हिंदुओं की आबादी पर आ रहे संकट के बीच नेपाल उस इतिहास की ओर बढ़ना चाहता है, जो 2008 में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने से पहले था यानी हिंदू राष्ट्र और राजशाही व्यवस्था।

सूत्रों की मानें तो हिंदू राष्ट्र और राजशाही की बहाली के मुद्दे को लेकर करीब 50 संगठन नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं और गोलबंदी में जुटे हैं। बागमती प्रांत से होते हुए उत्तराखंड की सीमा से लगे सुदूर पश्चिम प्रांत के जिलों तक हस्ताक्षर अभियान पहुंच चुका है।

इसकी कमान शाही युवा शक्ति नेपाल (आरवाईपी) ने संभाली है। उन प्रवासी नेपाली नागरिकों को भी इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है। नेपाल की 80 प्रतिशत आबादी से छह माह में हस्ताक्षर कराने का लक्ष्य है। अब तक 20 लाख हस्ताक्षर आफलाइन कराए जा चुके हैं और 80 हजार आनलाइन।

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