सुप्रीम कोर्ट: हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अपने आप न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं कर सकते
मुख्य निर्णय : 19cb
- किसे अधिकार है?: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही तभी शुरू हो सकती है जब उसे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या चीफ जस्टिस द्वारा गठित जजों की समिति से मंजूरी मिली हो।
- रजिस्ट्रार जनरल का अधिकार नहीं: रजिस्ट्रार जनरल को संवैधानिक योजना या नियमों के तहत अपने आप suo motu अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का कोई अधिकार नहीं है। वो केवल चीफ जस्टिस और जजों की ओर से कार्य कर सकता है।
- अनुच्छेद 235: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत न्यायिक अधिकारियों पर अनुशासनात्मक नियंत्रण हाईकोर्ट और हाईकोर्ट सामूहिक रूप से, यानी चीफ जस्टिस और उनके साथी जजों के पास है। 19cbdeec
मामला क्या था?
- उत्तराखंड की एक सिविल जज दीपाली शर्मा को विभागीय कार्यवाही के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया।
- ये अनुशासनात्मक कार्यवाही उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने शुरू की थी।
- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जज को बहाल कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने प्रशासनिक पक्ष से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 19cb9561
सुप्रीम कोर्ट का फैसला :
- CJI सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने उत्तराखंड की सिविल जज की बहाली को बरकरार रखा।
- कोर्ट ने कहा कि कार्यवाही “शुरुआत से ही अधिकार क्षेत्र की त्रुटि” से ग्रस्त थी।
- चीफ जस्टिस या जजों की समिति की मंजूरी के बिना शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू से ही शून्य void ab initio है। 19cb9561
महत्वपूर्ण टिप्पणी:
- कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं की, केवल यह तय किया कि कार्यवाही वैध रूप से शुरू हुई थी या नहीं।
- कोर्ट ने माना कि आरोप गंभीर थे, लेकिन कार्यवाही की शुरुआत में ही बुनियादी दोष था। 19cbdeec
केस: HIGH COURT OF UTTARAKHAND AT NAINITAL Vs DEEPALI SHARMA | SLP(C) No. 16520/2026 deec

