सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली है।

कहीं गुलाबी रंग का पेट्रोल, कहीं टैंक से चिपकी चीटियां, कहीं पेट्रोल के साथ दिखता पानी। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली है।

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है। जबकि एथेनॉल बनाने के लिए जरूरी गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलें देश में ही पैदा होती हैं। इसलिए 2001 में भारत सरकार ने एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ पेट्रोल पंपों पर 5% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सप्लाई की। ये सफल रहा। इसके बाद 2003 में शुरू हुआ एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम…

• शुरुआत में 9 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों में 5% एथेनॉल ब्लेंडिंग वाला पेट्रोल बेचने का टारगेट रखा गया। लेकिन 2013-14 तक पेट्रोल में सिर्फ 0.1% से 1.5% एथेनॉल मिला होता था।
• मई 2014 में मोदी सरकार आई। नितिन गडकरी परिवहन मंत्री बने। उन्होंने बायोफ्यूल और एथेनॉल ब्लेंडिंग पर जोर दिया।
• सरकार बनने के महीनेभर में एथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेट 5% से 10% कर दिया। जून 2022 में लक्ष्य पूरा भी कर लिया गया।
• 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए सरकार ने 2030 तक का टारगेट तय किया था, लेकिन इसे भी 2025 में हासिल कर लिया। 1 अप्रैल 2026 तक देशभर में E20 पेट्रोल रोलआउट हो चुका है।
इसके अलावा देश के 48 पेट्रोल पंपों पर E85 पेट्रोल भी रोलआउट हो चुका है। यानी 85% एथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल। दिसंबर 2026 तक इसे 500 पंपों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। 10 जून को नितिन गडकरी ने कहा कि उनकी सरकार ने 100% एथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को भी मंजूरी दे दी है।

• दिल्ली के पालिका भवन में 20 साल से कार रिपेयरिंग कर रहे दीपक राज बताते हैं, ‘जब से पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ी है, तब से फ्यूल से जुड़े पार्ट्स फ्यूल सेंसर, पंप और फिल्टर तीनों में दिक्कते आ रही है। फ्यूल टैंक में काई जमने की शिकायतें भी आई हैं।’
• ऑटोमोटिव एक्सपर्ट टूटू धवन कहते हैं, ‘एथेनॉल से लोग गाड़ियों का माइलेज कम होने की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन इसकी सही तरीके से टेस्टिंग नहीं हो रही है। सरकार और एजेंसी को माइलेज की टेस्टिंग करके डेटा पेश करना चाहिए।’
• 2023 से पहले के कार मॉडल्स के मैनुअल में कंपनियों ने साफतौर पर लिखा है कि उनमें ज्यादा से ज्यादा E10 फ्यूल इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसलिए कम माइलेज और इंजन में खराबी की शिकायतें थोक में आ रही हैं।
• पिछले महीने मारुति सुजुकी ने फ्लेक्स इंजन कार लॉन्च की है, लेकिन पहले 4 हफ्तों में ऐसी सिर्फ 3 कारें बिकीं। फ्लेक्स फ्यूल इंजन, जो 100% पेट्रोल, 100% एथेनॉल या दोनों के किसी भी ब्लेंड से चले।
• 2018 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया था कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से डीजल 50 रुपए लीटर और पेट्रोल 55 रुपए लीटर तक मिलने लगेगा।
• अप्रैल 2026 से सरकार ने पूरे देश में E20 फ्यूल अनिवार्य कर दिया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम ज्यों के त्यों बने हुए हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग के बावजूद भी उनके दामों में कोई कमी नहीं आई है।
• एक लीटर एथेनॉल करीब 58 रुपए का है। हिसाब लगाएं, तो भोपाल में E20 पेट्रोल की अनुमानित कीमत 102 रुपए होनी चाहिए, जो फिलहाल 114 रुपए है।
• ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट अमित खरे के मुताबिक, एथेनॉल के दाम अभी सरकार तय कर रही है। अगर सरकार ऐसा बंद कर दे तो एथेनॉल सस्ते दाम पर भी बिक सकता है, जिससे एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के दाम और घट सकते हैं।

• एथेनॉल ब्लेंडिंग को प्रमोट करने में नितिन गडकरी सबसे आगे रहे हैं। उन पर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट के आरोप भी लगते हैं।
• दरअसल, उनके बेटे सारंग गडकरी और निखिल गडकरी पूर्ति ग्रुप के जरिए चीनी और एथेनॉल प्रोडक्शन करते हैं।
• ग्रुप की मानस एग्रो इंडस्ट्रीज 2022 में सालाना करीब 2 करोड़ लीटर एथेनॉल बना रहा था। वहीं CIAN एग्रो इंडस्ट्रीज ने कार्बन डाइऑक्साइड से एथेनॉल बनाने का एग्रीमेंट किया है।
• जुलाई 2021 में CIAN एग्रो के एक शेयर की कीमत 36.4 रुपए थी, जो अभी 1659.8 रुपए पर पहुंच गई है। यानी 5 साल में करीब 4460% की बढ़त। इस बीच अक्टूबर 2025 में ये अपने रिकॉर्ड हाई लेवल 3122 रुपए पर पहुंचा।
• अप्रैल 2026 में जब देश में E85 फ्यूल की चर्चा थी, तब इस कंपनी के शेयरों पर रोज अपर सर्किट लग रहा था। यानी शेयर का दाम हर रोज 5% बढ़ रहा था।
• कांग्रेस ने नितिन गडकरी पर आरोप लगाते हुए कहा कि E20 को बढ़ावा देना क्या लोगों की भलाई के लिए है या फिर गडकरी के बेटों और उनकी कंपनियों के लिए कथित मुनाफे के लिए?
• अक्टूबर 2025 में गडकरी ने कहा था कि सरकार हर साल 1400 करोड़ टन एथेनॉल खरीदती है। मेरे बेटों की कंपनी का देश के कुल एथेनॉल सप्लाई में 0.5% से भी कम हिस्सा है।
• भारत की गाड़ियों पर एथेनॉल के असर पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने स्टडी की थी, लेकिन इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। सरकार इसे गोपनीय बताती है।
• ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट अमित खरे के मुताबिक, जो सच है वह पब्लिक को बताना चाहिए। जैसे ऐवरेज में कमी आएगी, इंजन में खराबी आएगी, पुरानी गाड़ियों की रीसेल वैल्यू घटेगी। लोगों को बताना चाहिए कि क्या टेस्ट हुए थे और उसकी क्या रिपोर्ट आई थी।
• 2021 में नीति आयोग ने सिफारिश की थी कि एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल सस्ते दाम पर बेचा जाना चाहिए। लेकिन E20 रोलआउट होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में कोई कमी नहीं आई है।

  1. गन्ने-मक्के का विकल्प ढूंढना
    • भारत में अभी ज्यादातर एथेनॉल सीधे गन्ने या अनाज से बन रहा है, जो फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल है। इससे पानी और खाने की कमी हो सकती है।
    • सरकार को सेकेंड जनरेशन एथेनॉल पर फोकस करना चाहिए, जो गन्ने की खोई, पराली, बांस, धान की भूसी और अन्य कचरे से बनाया जाता है।
    • भारत में हर साल 16 करोड़ टन धान की पराली होती है। इसका इस्तेमाल एथेनॉल में करने से प्रदूषण भी कम होगा और फसल में लगने वाले ज्यादा पानी की भी बचत होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *