मध्य प्रदेश के खंडवा में तैनात अपर सत्र न्यायाधीश अक्षय कुमार द्विवेदी ने आलीशान सरकारी बंगला, वीआईपी कार और अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया है।
वे एक छोटे से कमरे में रहते हैं, अपना खाना खुद बनाते हैं और रोजाना पैदल ही कोर्ट जाते हैं।
जज अक्षय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को आवेदन देकर अपनी सैलरी आधी करने की मांग भी की है। निजी संपत्ति के नाम पर उनके पास सिर्फ अपनी मां द्वारा दिया गया एक मोबाइल फोन है। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया है। तबादले पर उन्होंने विभाग से कहा है कि उन्हें देश में कहीं भी भेजा जाए, वे न्यूनतम सरकारी सुविधाएं ही लेंगे।
बचपन में अपनी मां को संपत्ति विवाद के दौरान अदालत के चक्कर लगाते देखकर उन्होंने जज बनने का निर्णय लिया था। इसी कारण वे अपनी अदालत में आने वाले मुकदमों, खासकर जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का निपटारा बेहद तेजी से करते हैं ताकि आम लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।

