क्वांटम विश्वविद्यालय बना वैश्विक मंच: प्रूडेंस’26 में एआई और ग्रीन फ्यूचर पर चर्चा

प्रूडेंस’26 का भव्य शुभारंभ: क्वांटम विश्वविद्यालय में एआई से हरित भविष्य पर वैश्विक मंथन

· रुड़की में गूंजा सतत विकास का मंत्र: प्रूडेंस’26 का जोरदार आगाज

· क्वांटम विश्वविद्यालय बना वैश्विक मंच: प्रूडेंस’26 में एआई और ग्रीन फ्यूचर पर चर्चा

रुड़की, 17 अप्रैल 2026 । रुड़की स्थित क्वांटम विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन प्रूडेंस’26 का शुभारंभ 17 अप्रैल को अत्यंत उत्साह और अकादमिक गरिमा के साथ हुआ। “सतत प्रबंधन के माध्यम से हरित भविष्य हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” विषय पर आधारित इस सम्मेलन का उद्घाटन समारोह विश्वविद्यालय के हार्मनी हॉल में आयोजित किया गया, जिसमें देश-प्रदेश से आये 200 से अधिक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों ने सहभागिता की।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके पश्चात विभिन्न गणमान्य वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से सतत विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

क्वांटम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विवेक कुमार ने अपने उद्घाटन संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई न केवल शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में बदलाव ला रहा है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी के साथ उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नवाचार एवं तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया।

इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मुख्य अतिथि डॉ. प्रतिभा मेहता लूथरा, कुलपति, गुरुकुल कांगड़ी (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), हरिद्वार ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच संबंध स्थापित किया। उन्होंने वेदों के सिद्धांतों के माध्यम से एआई के नैतिक उपयोग पर प्रकाश डाला तथा “तीन पी—पीपल, प्रोडक्ट और प्लैनेट” को सतत विकास का आधार बताया।

वहीं इस सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि श्यामल चटर्जी, निदेशक, टपरवेयर, देहरादून ने अपने संबोधन में आधुनिक व्यावसायिक प्रबंधन में सतत विकास की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके संगठन पर्यावरण के अनुकूल रहते हुए भी अपनी कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सकते हैं। वहीं इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. एस. सी. बागरी, मानद निदेशक, पर्यटन एवं आतिथ्य प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र, देहरादून ने अपने विचारों में संगठन के विजन और मिशन की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में एआई की भूमिका को भी विस्तार से समझाया और सतत विकास के लिए इसके उपयोग पर बल दिया।

इसके अलावा क्वांटम स्कूल ऑफ बिजनेस के निदेशक प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने इस अंतराष्ट्रीय सम्मलेन के मुख्य विषय को स्थापित करते हुए तीन प्रमुख बिंदुओं जिनमें एआई का उपयोग, सतत प्रबंधन और हरित भविष्य में विभाजित करते हुए उनके महत्व को स्पष्ट किया और सभी प्रतिभागियों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन स्मारिका का औपचारिक विमोचन भी किया गया, जो इस आयोजन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के म्यूजिक क्लब द्वारा कुलगीत प्रस्तुत किया गया, जिसने समारोह को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।

उद्घाटन सत्र एवं भोजनावकाश के पश्चात सम्मेलन का दूसरा सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें मलेशिया की ग्लोबल नेक्स्ट यूनिवर्सिटी के एडजंक्ट प्रोफेसर डॉ. मुथुमिन्नाह द्वारा एक ऑनलाइन सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में उन्होंने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सतत विकास हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर प्रकाश डाला और प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से अवगत कराया। इसके बाद तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देश-प्रदेश के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के डॉ. रविंद्र कुमार तथा डॉ. नूपुर जायसवाल द्वारा की गई, जिन्होंने प्रस्तुत शोध कार्यों का मूल्यांकन करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

इस अवसर पर क्वांटम विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष अजय गोयल , बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट एवं ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य शोभित गोयल , विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमित दीक्षित , क्वांटम स्कूल ऑफ़ टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. बृज मोहन सिंह, डीन अकादमिक डॉ. सत्येंद्र कुमार , ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट हेड डॉ. पुष्पेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारीगण , शिक्षक संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अंतराष्ट्रीय सम्मलेन की मुख्य संयोजिका डॉ. निर्मेश शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया । वहीं इस सम्मलेन की सह-संयोजिका डॉ. वर्षा गुप्ता एवं डॉ. मौसमी गोयल ने कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वय में सक्रिय रूप से जुड़ी रहीं।

प्रूडेंस’26 सम्मेलन क्वांटम विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सम्मेलन विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों को एक मंच प्रदान करता है, जहां वे विचारों का आदान-प्रदान कर एक हरित और सतत भविष्य की दिशा में सार्थक योगदान दे सकते हैं। यह दो सम्मेलन आगामी सत्रों और चर्चाओं के साथ कल भी जारी रहेगा, जो प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध होगा।

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