वाराणसी के चर्चित ज्ञानवापी मामले से देशभर में सुर्खियों में आए न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में कथित बदलाव को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है।

वाराणसी के चर्चित ज्ञानवापी मामले से देशभर में सुर्खियों में आए न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में कथित बदलाव को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है।

उन्होंने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर कहा कि उनकी सुरक्षा में तैनात गनर कांस्टेबल रविंद्र सिंह ठकुंरैला को बिना उनकी सहमति और सूचना के बदल दिया गया।

न्यायाधीश के अनुसार शासनादेश और इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। उनका सवाल है कि जब सुरक्षा व्यवस्था व्यक्तिगत तौर पर निर्धारित है तो गनर बदलने का निर्णय बिना जानकारी दिए क्यों लिया गया। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर पहले वाराणसी के ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। इसके बाद वह चित्रकूट और बरेली में भी न्यायिक दायित्व निभा चुके हैं। नवंबर 2025 में बरेली से स्थानांतरण के बाद उन्होंने मुजफ्फरनगर में कार्यभार संभाला। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में तैनाती के बाद उनके द्वारा सुनाए गए लगातार सख्त फैसलों ने न्यायिक जगत के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींचा है। सरकारी अधिवक्ता के मुताबिक, नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर आने के बाद अब तक अदालत ने नौ संगीन हत्याकांडों में कुल 22 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

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