माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, श्री योगी आदित्यनाथ जी MYogiAdityanath Ji और परमार्थ निकेतन Parmarth Niketan के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की लखनऊ में हुई दिव्य भेंटवार्ता
✨ #अयोध्या व #प्रयागराज के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विकास पर हुई विशेष चर्चा
🌸 परमार्थ निकेतन की दिव्य गंगा आरती में सहभाग हेतु किया आमंत्रित
ऋषिकेश, 18 मई। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी तथा परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की दिव्य एवं अत्यंत प्रेरणादायक भेंटवार्ता सम्पन्न हुई। इस अवसर पर राज्य के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा आध्यात्मिक मूल्यों के संवर्धन पर विस्तृत एवं सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।
इस दिव्य संवाद में विशेष रूप से पावन नगरी अयोध्या तथा तीर्थराज प्रयागराज के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विकास पर गहन चर्चा हुई। दोनों ही नगर भारतीय सभ्यता, आस्था और सनातन संस्कृति के जीवंत प्रतीक हैं, जिनके समग्र विकास हेतु दूरदर्शी एवं लोककल्याणकारी दृष्टिकोण साझा किया गया। यह भेंट राष्ट्र के लिए विकास और विरासत के समन्वय का अनुपम उदाहरण बनी।
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हो रहे ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी विकास कार्यों की सराहना करते हुए पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश केवल आधारभूत संरचना, औद्योगिक विकास और सुशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण में भी नई पहचान स्थापित कर रहा है। प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सौहार्द का वातावरण निरंतर सुदृढ़ हो रहा है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वास्तविक विकास वही है जो प्रकृति, संस्कृति और अध्यात्म के संतुलन के साथ आगे बढ़े। उन्होंने नदियों की पवित्रता, पर्यावरण संरक्षण तथा युवा पीढ़ी में सनातन मूल्यों के संवर्धन पर विशेष बल दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि जब शासन, संत परंपरा और समाज एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब राष्ट्र वास्तविक अर्थों में उन्नति करता है। जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा नदियों की स्वच्छता जैसे अभियानों को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है।
इस पावन अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को प्रभु श्रीराम जी की दिव्य प्रतिमा एवं अंगवस्त्र प्रदान कर उनका आत्मीय अभिनन्दन किया।

