राम मंदिर चढ़ावा चोरी में नया खुलासा: ‘सब अपने लड़के हैं’ कहकर पदाधिकारी ने रुकवाई थी सीसीटीवी की निगरानी, खुफिया कैमरों ने खोली पोल
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद में स्थित भव्य राम मंदिर के खजाने और दानपात्र की राशि में हुए करीब 8 करोड़ रुपये के महा-घोटाले में हर दिन ऐसे चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं, जिसने मंदिर प्रबंधन से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक भूचाल ला दिया है।
इस पूरे प्रकरण में अब एक बेहद विस्मयकारी और आंतरिक मिलीभगत की कहानी सामने आई है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ वर्ष पूर्व जब मंदिर के अति-संवेदनशील नोट गणना कक्ष (कैश काउंटिंग रूम) में सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने की कवायद शुरू हुई थी, तब ट्रस्ट के ही एक बेहद रसूखदार पदाधिकारी ने इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने यह दलील देकर कैमरा लगाने से रोका था कि “गिनती करने वाले सब अपने ही लड़के (विश्वस्त सेवादार) हैं, यहाँ कैमरा लगाने की क्या जरूरत है।”
इस आंतरिक विरोध और खुफिया कैमरों की कामयाबी के तकनीकी घटनाक्रम पर नजर डालें तो उस पदाधिकारी के भारी विरोध के बावजूद सुरक्षा अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए गणना कक्ष में कैमरे तो लगाए ही, साथ ही कुछ बेहद हाई-टेक ‘हिडन कैमरे’ (छिपे हुए कैमरे) भी गोपनीय स्थानों पर इंस्टॉल कर दिए। नियति का संयोग देखिए कि जिन सेवादारों पर ‘अपने लड़के’ होने का अंधविश्वास जताया जा रहा था, उन्हीं के काले कारनामों और नोटों की गड्डियां पार करने की लाइव करतूतों को इन खुफिया कैमरों ने पूरी तरह कैद कर लिया। अगर ये छिपे हुए कैमरे न होते, तो करोड़ों हिंदुओं की आस्था के चढ़ावे पर डाका डालने वाले इन शातिर चोरों के चेहरे कभी बेनकाब नहीं हो पाते।
जांच टीम की रडार पर आए सिंडिकेट के ताने-बाने और इसके सरगना अनुकल्प मिश्रा के रसूख की बात करें तो दबोचे गए सभी पांचों संदिग्ध कर्मी वर्षों से एक ही फिक्स शिफ्ट में नोटों की गिनती का काम कर रहे थे। इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड और नेतृत्वकर्ता मिल्कीपुर का रहने वाला अनुकल्प मिश्रा था, जो खुद भी मंदिर में सेवादार था। अनुकल्प मिश्रा को न केवल ट्रस्ट के कुछ बड़े पदाधिकारियों का, बल्कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े अन्य प्रभावशाली लोगों का भी सीधा ‘वरदहस्त’ (संरक्षण) प्राप्त था। इसी रसूख के बल पर उसने अपने ससुर रवि मिश्रा के जरिए अपने कार मिस्त्री जीजा लवकुश मिश्रा को भी इसी मलाईदार शिफ्ट में एंट्री दिलवाई थी, जिसके घर के गोबर के ढेर से शनिवार को 10 लाख रुपये बरामद हुए हैं।
इस गिरोह पर मंदिर प्रशासन की मेहरबानी और सुरक्षा में हुई ऐतिहासिक लापरवाही का विवरण रोंगटे खड़े करने वाला है। गोपनीय कक्ष में नोट गिनने वाले इन चुनिंदा कर्मियों पर ट्रस्ट को इतना अंधा भरोसा था कि वर्षों बीत जाने के बाद भी कभी इनका कार्यक्षेत्र या इनकी शिफ्ट नहीं बदली गई। मेहरबानी और वीवीआईपी ट्रीटमेंट की हद तो यह थी कि करोड़ों रुपये की नकदी गिनकर जब ये कर्मचारी कक्ष से बाहर निकलते थे, तो मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा इनकी कोई भौतिक तलाशी (फ्रिस्किंग) तक नहीं ली जाती थी। दो शिफ्टों में काम होने के बावजूद अनुकल्प के गिरोह वाले लड़कों को कभी एक-दूसरे से अलग नहीं किया गया; चाहे सुबह की ड्यूटी हो या शाम की, इनका साथ हमेशा बरकरार रखा गया ताकि चोरी की सेटिंग में कोई बाधा न आए। इसी अवैध काली कमाई के वैभव का प्रदर्शन करते हुए मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने हाल ही में अपने गांव में भव्य श्रीमद्भागवत कथा और शादियों का आयोजन कर पानी की तरह पैसा बहाया था और सरेआम कीमती साड़ियां व उपहार बांटे थे।
इस महा-घोटाले की तकनीकी विफलता के सबसे बड़े कोण को देखें तो गणना कक्ष के ठीक आसपास उत्तर प्रदेश पुलिस या प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के जवानों की कोई रूटीन ड्यूटी तक नहीं लगाई गई थी। गिनती पूरी होने के बाद भारी नकदी को बैंक के चेस्ट तक ले जाने का काम भी केवल संबंधित बैंक के सुरक्षाकर्मी ही करते थे। यह पूरा घोटाला कभी पकड़ में ही नहीं आता, यदि मंदिर के इंटरनल ऑडिट (आंतरिक वित्तीय लेखा-परीक्षण) की टीम ने एक बड़ा मिसमैच न पकड़ा होता। ऑडिट टीम ने पाया कि रामलला के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की दैनिक संख्या और रिकॉर्ड तोड़ आमद के सापेक्ष बैंक खातों में जमा होने वाली नकदी की मात्रा बहुत कम और संदेहास्पद थी। इसी इनपुट के बाद जब खुफिया सर्विलांस लगाया गया, तब जाकर इस 8 करोड़ के नेक्सस का भंडाफोड़ हुआ।
बीते शुक्रवार को इस महा-चोरी का लाइव सिंडिकेट पकड़ में आने के बाद से अब पूरे रामजन्मभूमि परिसर को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है और सुरक्षा व जांच को लेकर बेहद कड़ी गोपनीयता बरती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के रडार पर अब मंदिर के वो रसूखदार लोग भी हैं जिन्होंने कैमरों का संचालन बंद रखने या उन्हें केवल दिखावे के लिए लगाने की साजिश रची थी। वर्तमान में पुलिस हिरासत में बंद जीजा लवकुश मिश्रा और साले अनुकल्प मिश्रा की निशानदेही पर एसआईटी की टीमें अन्य संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं, जिससे अब तक कुल ₹2.38 करोड़ की लाइव रिकवरी की जा चुकी है और कई अन्य सफेदपोशों की गिरफ्तारी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है

