हरे राम आश्रम की संपत्ति का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

मनोज ठाकुर

मेरा जिला प्रशासन से निवेदन है कि इसको गंभीरता से देते हुए इसकी जांच करना चाहिए

राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों एवं हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण , हरिद्वार के द्वारा बिल्डर एवं प्रबंधक के दबाव एवं प्रभाव में आकर उक्त के पक्ष में दिनांक 25.06.1958 सहारनपुर उ0 प्र0 सब रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत ट्रस्ट डीड में संपत्ति सीमांकन चैहद्दी विवरण अर्थात संपत्ति सीमा निर्धारण का बिना संज्ञान लिए एवं संपत्ति सीमांकन कराना भी उक्त राजस्व अधिकारियों ने उचित नहीं समझा।

हरे राम आश्रम की समस्त संपत्ति धर्मार्थ / सार्वजनिक ट्रस्ट निहित होने के पश्चात भी उक्त राजस्व अधिकारियों मनमाने तरीके से नियम एवं कानून विरूद्ध निजी स्वामित्व संबंधी जांच आख्या एचआरडीए में प्रेषित की तथा उक्त जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर प्राधिकरण के रंगा-बिल्ला अधिकारियों ने पहले मानचित्र शमन कर दिया। जोकि वर्तमान में भी असत्य एवं आधारहीन हैं।


हरे राम आश्रम ट्रस्ट संबंधी माननीय न्यायालय हरिद्वार में चले हरे राम आश्रम बनाम गोपाल दास महाराज मूलवाद 4/92 जिला सत्र न्यायाधीश सहारनपुर ,हरिद्वार कोर्ट में कपिल मुनि महाराज के गुरू सुखदेव मुनि द्वारा हरे राम आश्रम ट्रस्ट की अचल संपत्ति विक्रय किए जाने हेतु अनुमति मांगी गई थी।

जिसमें माननीय न्यायालय ने स्पष्ट कथन किया हैं कि वादीगण हरे राम आश्रम हरे राम आश्रम ट्रस्ट की अचल संपत्ति विक्रय किए जाने की अनुमति चाहते हैं उस संपत्ति के संबंध में एक वाद संख्या-5/87 माननीय अपर जिला जज, तृतीय सहारनपुर के यहां विचाराधीन हैं, जिसमें यह आदेश दिया गया हैं कि न्यायालय की अनुमति के बिना संपत्ति विक्रय न की जाए।

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