सहारनपुर। दान में मिला, फिर वापस भी ले गए… सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षा का आधुनिक सपना उस समय टूट गया, जब एक एनजीओ ने खुद दान में दिए गए एलईडी टीवी, प्रिंटर और अन्य उपकरण वापस ले लिए।

विद्यालयों को पहले दान में दिया सामान, फिर ले गए वापस


सहारनपुर। दान में मिला, फिर वापस भी ले गए… सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षा का आधुनिक सपना उस समय टूट गया, जब एक एनजीओ ने खुद दान में दिए गए एलईडी टीवी, प्रिंटर और अन्य उपकरण वापस ले लिए।

कुतुबपुर लबडौला और लाखनौर समेत अन्य परिषदीय विद्यालयों से सामान वापस लिए जाने के बाद छात्र मायूस हैं और शिक्षक भी हैरान हैं।

एनजीओ की तरफ से तर्क दिया गया कि सामान इस्तेमाल नहीं हो रहा था, इसलिए वापस लिया गया है। खास बात यह है कि उनमें मुख्यमंत्री से सम्मानित विद्यालय भी शामिल हैं।

दरअसल, एक एनआरआई द्वारा संचालित एनजीओ विद्याज्ञान इंडिया सरकारी विद्यालयों में पठन और पाठन सामग्री भेंट करते रहे हैं।

वह विद्यालयों को स्टेशनरी के साथ ही एलईडी टेलीविजन, प्रिंटर सहित अन्य सामान भेंट करते हैं। दो वर्ष पहले 50 से अधिक परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को स्टेशनरी उपलब्ध कराई थी, साथ ही आठ विद्यालयों में एलईडी टेलीविजन और प्रिंटर आदि दिए थे, जिससे कि विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधर सके। एलईडी टेलीविजन लगने के बाद से शिक्षक उसे वाईफाई से कनेक्ट कर विद्यार्थियों को शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से पढ़ा और विषयों को समझा रहे थे, लेकिन कुछ दिन पहले अचानक एनजीओ की टीम विद्यालय पहुंची और एलईडी टेलीविजन और प्रिंटर उठाकर ले गई।

शिक्षकों ने कारण पूछा तो टीम ने बताया कि आपका विद्यालय सामान लेने के लायक नहीं है। इसलिए सामान वापस लिया जा रहा है।

सामान एनजीओ ने ही दिया था, ऐसे में शिक्षक मना नहीं कर सके। कुतुबपुर लबडौला के सहायक अध्यापक डॉ. कृपाल मलिक का कहना है कि सामान वापस ले लिए जाने से विद्यार्थी मायूस हैं।

मुख्यमंत्री से सम्मानित है विद्यालय जिन विद्यालयों से सामान वापस लिया गया है उनमें उच्च प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर लबडौला भी शामिल है, जिसके छात्र अनेक गतिविधियों में विद्यालय, विभाग और जनपद का नाम राष्ट्रीय स्तर तक रोशन कर चुके हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापक इंदु बैस को दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहतर कार्य के लिए सम्मानित किया है

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