उत्तराखंड के Bageshwar जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो पलायन की समस्या के बीच उम्मीद की नई किरण बन रही है

यहां पारंपरिक खेती को बंदरों और जंगली सूअरों के कारण भारी नुकसान हो रहा था। हालात ऐसे हो गए थे कि किसान गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे थे 😔

लेकिन इसी चुनौती के बीच IAS अधिकारी Akanksha Konde ने जिलाधिकारी रहते हुए एक अनोखी पहल शुरू की 💡

उन्होंने किसानों को “कुटकी” की खेती के लिए प्रेरित किया—एक महत्वपूर्ण हिमालयी औषधीय पौधा 🌿
👉 इसकी जड़ दवाइयों में इस्तेमाल होती है
👉 सबसे खास बात—इसे बंदर और जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते

यह पौधा ठंडे इलाकों में, करीब 1000 मीटर की ऊंचाई पर आसानी से उगाया जा सकता है 🏔️
और एक बार रोपाई के बाद करीब 3 साल में किसानों को अच्छी आमदनी देने लगता है 💰

🔥 आज हालात बदल चुके हैं:
👉 10 हेक्टेयर में 11 लाख कुटकी के पौधे लगाए जा चुके हैं
👉 खेती सुरक्षित हुई और किसानों की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई
👉 जिला प्रशासन खुद उत्पाद की बिक्री में मदद कर रहा है

👩‍🌾 इस अभियान से 300+ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए जुड़ चुकी हैं
👉 कुछ समूहों की सालाना आय 55 लाख रुपये तक पहुंच गई है—जो एक बड़ी उपलब्धि है!

💥 जो गांव खाली हो रहे थे, वहां अब फिर से उम्मीद लौट रही है

यह पहल साबित करती है कि सही सोच और मजबूत नेतृत्व से पलायन जैसी बड़ी समस्या को भी रोका जा सकता है ❤️

👉 IAS Akanksha Konde हम सभी के लिए एक सच्ची प्रेरणा हैं!

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