मंच से ब्रजेश पाठक ने खोला सुनील भराला के सियासी कद का राज, बोले- देश में ब्राह्मण समाज की बात हो तो सबसे पहले आता है नाम
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के एक बयान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूर्व राज्यमंत्री सुनील भराला के सियासी कद को फिर चर्चा में ला दिया है।
गाजियाबाद के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के कार्यक्रम में पहुंचे ब्रजेश पाठक ने मंच से सुनील भराला की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश में कहीं भी ब्राह्मण समाज की बात आती है तो सुनील भराला का नाम सबसे पहले आता है।
डिप्टी सीएम का यह बयान महज मंचीय प्रशंसा तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसके पीछे भराला की तीन दशक से अधिक लंबी राजनीतिक सक्रियता, संगठन से जुड़ाव और जमीनी पकड़ को अहम माना जा रहा है।
विरासत से संस्कार, संघर्ष से पहचान
सुनील भराला को राजनीति के संस्कार विरासत में मिले। उनके पिता पंडित मलखान सिंह भारद्वाज लोकतंत्र सेनानी रहे, जो RSS में प्रचारक और भारतीय जनसंघ के दौर से राजनीति में जुड़े थे। वर्ष 1974 में उन्होंने जनसंघ के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था।
लेकिन भराला ने अपनी पहचान छात्र राजनीति और संगठनात्मक सक्रियता से बनाई। 90 के दशक से पश्चिमी UP में जमीन तैयार की और मेरठ से शुरू हुआ उनका दायरा पूरे प्रदेश तक पहुंचा।

