पुस्तकें केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे मनुष्य के आत्मनिरीक्षण, चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम होती हैं।डॉ. पुनीत पाठक

हरिद्वार, 14 अगस्त। पुस्तकें केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे मनुष्य के आत्मनिरीक्षण, चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम होती हैं।

पुस्तकें समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करती हैं। यदि जीवन को सफल और सार्थक बनाना है तो पुस्तकों को पढ़ने के साथ-साथ उनका गंभीरता से अध्ययन और मनन भी आवश्यक है।
यह विचार गुरुदेव कुटीर, बहादराबाद के मुख्य अधिष्ठाता एवं प्रबुद्ध संत डॉ. पुनीत पाठक महाराज ने डॉ. पंकज कौशिक द्वारा लिखित ‘प्रसार शिक्षा एवं मीडिया’ तथा ‘विज्ञापन पत्रकारिता एवं मीडिया’ पुस्तकों के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए।
डॉ. पुनीत पाठक महाराज ने कहा कि आज के डिजिटल युग में पुस्तकों का महत्व और भी बढ़ गया है। मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से सूचनाएं तो आसानी से प्राप्त हो जाती हैं, लेकिन पुस्तकें व्यक्ति को विषय की गहराई तक ले जाती हैं। पुस्तकें मनुष्य को चिंतनशील, संवेदनशील और विवेकशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि ‘प्रसार शिक्षा एवं मीडिया’ पुस्तक बी.एड., एम.ए. शिक्षा तथा एम.ए. प्रसार शिक्षा का अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी। पुस्तक में प्रसार शिक्षा, संचार एवं मीडिया से जुड़े विभिन्न विषयों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने डॉ. पंकज कौशिक को दोनों पुस्तकों के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा, मीडिया और पत्रकारिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उपयोगी साहित्य का सृजन आज की आवश्यकता है। ऐसे प्रयास विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान के नए द्वार खोलते हैं।
इस अवसर पर डॉ. पंकज कौशिक ने कहा कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों और मीडिया से जुड़े पाठकों को सरल भाषा में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनकी दो पुस्तकें पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा अब ‘प्रसार शिक्षा एवं मीडिया’ और ‘विज्ञापन पत्रकारिता एवं मीडिया’ दो नई पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है। उन्होंने कहा कि इन पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों को समझने में सहायता मिलेगी तथा मीडिया एवं संचार के बदलते स्वरूप को भी समझने का अवसर प्राप्त होगा।
डॉ. कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में मीडिया समाज के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए मीडिया की भूमिका, प्रसार शिक्षा, विज्ञापन, पत्रकारिता और जनसंचार के विभिन्न आयामों को समझना आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पुस्तकों में विषय-वस्तु को सरल, व्यवस्थित और उपयोगी रूप में प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर श्री गुरुदेव कुटीर से जुड़े संतों, विद्वानों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य लोगों ने डॉ. पंकज कौशिक को दोनों पुस्तकों के प्रकाशन पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में पुस्तकों के महत्व तथा वर्तमान समय में शिक्षा और मीडिया की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. पुनीत पाठक महाराज ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए ज्ञान का प्रसार अत्यंत आवश्यक है और पुस्तकें ज्ञान के प्रसार का सबसे प्रभावशाली माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवाओं से नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने, उनका मनन करने और अर्जित ज्ञान को समाज के हित में उपयोग करने का आह्वान किया। इस अवसर पर अरविंद शर्मा,विजय प्रताप सिंह, रमन सिंह यादव , विजयलक्ष्मी कौशिक, दिशा कौशिक, अभय त्यागी आदि उपस्थित है।

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