भाजपा के दो और सपा के एक नेता इमरान मसूद के संपर्क में..
चार सीटों पर नया चेहरा उतार सकती है भारतीय जनता पार्टी…
अवनींद्र कमल….
देहरादून / सहारनपुर। पिछले दिनों राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ सहारनपुर पहुंचे थे और उन्होंने एक तरह से 27 के विधानसभा चुनाव का श्री गणेश कर दिया। उन्होंने विकास कार्यों का हवाला देकर पार्टी के कुछ विधायकों की तारीफ भी की। उधर, उत्तर प्रदेश की नई कार्यकारिणी के गठन के बाद भाजपा के विधायकों के कार्यकाल का आंतरिक सर्वे भी तेजी से चल रहा है। सियासी पंडितों का कहना है कि बीजेपी कम से कम सहारनपुर में पुराने चेहरों पर दांव लगाने के मूड में नहीं है। इसी तरह बसपा या सपा गोत्र से भाजपा में आए नेताओं को भी किनारे किया जा सकता है। ऐसे में पूर्व मंत्री संजय गर्ग समेत, जगपाल और अन्य नेताओं के लिए भाजपा में चुनाव लड़ने की गुंजाइश न के बराबर है। टिकट न मिलने पर कई नेता पाला बदल सकते हैं। भाजपा में शामिल हुए दो नेता कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के संपर्क में बताए जाते हैं। सपा के एक नेता भी इसी श्रेणी में हैं। यहां बताना जरूरी है कि हाल ही में गठित भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी में अन्य पिछड़ा वर्ग को ज्यादा तरजीह दी गई है। 30 ओबीसी नेताओं को जगह मिली है जबकि सामान्य वर्ग के 27, अनुसूचित जाति के छह और अनुसूचित जनजाति का एक प्रतिनिधि शामिल है। विशेष बात यह है कि BJP ने यादवों के बजाय गैर-यादव ओबीसी समुदायों पर ज्यादा भरोसा जताया है। वैश्य जो कि भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं, उनमें केवल दो और एक कायस्थ को भी शामिल किया गया है। BJP के एक वैश्य नेता अपनी बिरादरी के प्रदेश कार्यकारिणी में कम प्रतिनिधित्व को लेकर चिंतित हैं। यह और बात है कि समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सहारनपुर के संजय गर्ग जैसे नेता कुछ भी बोल पाने की हैसियत में नहीं हैं। संजय गर्ग मरहूम और दिग्गज नेता काजी रशीद मसूद की कक्षा के विद्यार्थी रहे हैं। मूल रूप से वह सपा गोत्र के हैं। एक समय वह भी था जब संजय गर्ग, अपने घर रोजा अफ्तारी करते थे। यारी में मुसलमानों के यहां संजय गर्ग हैदराबादी बिरयानी और नूर पोलाव बड़े चाव से खाते थे। वह हिंदू मुस्लिम भाईचारा की बात करते थे। लेकिन भाजपा शामिल होते ही संजय शुद्ध शाकाहारी बनकर नींबू पानी पीने लगे हैं। लेकिन भाजपा में संजय का राजनीतिक भविष्य लगभग खत्म सा हो चुका है। कुछ और नेताओं का भी यही हाल होना है। रही बात सन 27 के चुनाव को लेकर टिकट की दावेदारी पर तो अभी घमासान होना बाकी है। सहारनपुर में भाजपा का कम से कम चार सीटों पर नए चेहरे पर दांव लगाने पर विचार चल रहा है। चार विधायकों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं बताई जाती। वैसे भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन, जाट राजनीति, राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन और समाजवादी पार्टी की सक्रियता को देखते हुए BJP के सामने बड़ी चुनौती है। प्रदेश महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से किसी नेता को जगह न मिलना भी भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के दो बड़े और समाजवादी पार्टी के एक नेता कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के संपर्क में हैं। अपने-अपने दलों में अगर उनकी दाल नहीं गली तो यह कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं…

