यह भ्रष्टाचार की देन है कि हाईवे बनते नहीं और टूट पहले जाते हैं जनता के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है
उन्नाव में 105 किमी के गंगा एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बिछिया से सफीपुर तक लगभग 22 किमी तक एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन कई स्थानों पर धंस गई है।
सर्विस लेन के धंसने की समस्या लगभग 18 स्थानों पर आई है। जिसके बाद एक बार फिर गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण मानकों पर सवाल खड़े हो गए हैं। गंगा एक्सप्रेस वे की सर्विस लेन पर यह समस्या
397 से लेकर 419 किमी के बीच पाई जा रही है। वहीं समस्या से अवगत हाेते हुए गंगा एक्सप्रेस वे की निर्माण एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर के इंजीनियरों ने मरम्मतीकरण शुरू करवा दिया है। मरम्मतीकरण के लिए सर्विस लेन पर आवागमन बंद करने को पत्थर लगाकर रास्ता रोका गया है। जिससे सर्विस लेन पर चलने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण यातायात व किसानों को समस्या हो रही है।
प्रयागराज से मेरठ तक बनाए गए गंगा एक्सप्रेस वे के किनारे बनी सर्विस लेन भी अब किलोमीटर 397 से लेकर 419 के बीच कई जगह धंस गई। जिसकी वजह कार्यदाई संस्था के लोग के भार वाहनों का सर्विस लेन से निकलना बता रहे हैं तो वहीं ग्रामीण निर्माण में खामियों पर इशारा कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रोड निर्माण के लिए अधिक मिट्टी भरान तो हुआ लेकिन सही तरीके से रोलर चलकर उसे ठोस नहीं किया गया। यही वजह है कि पहली बारिश में ही सर्विस रोड जगह-जगह धंसने लगी। दही क्षेत्र के शहजादपुर से लेकर सफीपुर तक गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बनाई गई सर्विस लेन किलोमीटर संख्या 419, 410, 408, 405, 400, 397 आदि पर कई जगह धंसी है।
अजगैन के अजैया खेड़ा के पास पत्थर लगाकर चार पहिया व भार वाहनों को सर्विस लेन पर जाने से रोक दिया गया। कार्यदाई संस्था ने पुलिस को भी सड़क धंसने व मरम्मतीकरण के लिए सहयोग मांगा है। पुलिस को अवगत करवाते हुए मांग की है कि जो भी भार वाहन सर्विस लेन पर नजर आए उन पर कार्रवाई की जाए।
बिछिया क्षेत्र में औद्योगिक गलियारा स्थल सरायं कटियान गांव के पास 23 फरवरी को गंगा एक्सप्रेस वे की करीब आठ मीटर डामरीकृत मुख्य सड़क पूरी तरह से धंस गई थी। मरम्मत के दौरान जब इस क्षतिग्रस्त रोड को उखड़वाया गया था तो उसके नीचे से करीब आधा सैकड़ा सीमेंट की बोरियां निकली थीं। तब प्रकाशित खबर में जागरण ने इशारा किया था कि इस प्रकार की गड़बड़ी कितनी जगह हुई है, इसका भी खुलासा कभी न कभी होगा ही। तब भी स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि मार्ग निर्माण में जमकर लापरवाही बरती गई। बसहा झील की काली मिट्टी एक्सप्रेस वे के रोड निर्माण में डाली गई जो गुणवत्ता के अनुसार नहीं पड़नी चाहिए थी।
गंगा एक्सप्रेस वे परियोजना की 594 किमी तक जहां कुल लागत लगभग 36,500 करोड़ रुपये है। वहीं उन्नाव में 105 किमी पर निर्माण के लिए लगभग 6400 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।इसमें 625 करोड़ रुपये 1354 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण पर खर्च हुआ है।.

