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हेडलाइन: हिंदी दिवस विशेष: 1977 में UN में गूंजी थी हिंदी की गर्जना, अटल जी ने दिखाया था आत्मविश्वास का मंत्र
हरिद्वार, 14 सितंबर।
आज हिंदी दिवस के अवसर पर पूरा देश अपनी मातृभाषा का गौरव मना रहा है। इस अवसर पर हमें 1977 की वह ऐतिहासिक घटना याद आती है जब दुनिया के सबसे बड़े मंच ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ पर पहली बार हिंदी गूंजी थी।
अक्टूबर 1977 में तत्कालीन विदेश मंत्री और बाद में भारत के प्रधानमंत्री बने श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें सत्र में हिंदी में अपना ऐतिहासिक संबोधन दिया था। वाजपेयी जी संयुक्त राष्ट्र को हिंदी में संबोधित करने वाले पहले व्यक्ति थे। अपने भाषण में उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम, परमाणु निरस्त्रीकरण, गुट निरपेक्षता और आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों को उठाया था।

उस भाषण में भारत का आत्मविश्वास झलक रहा था, जो अपनी भाषा में दुनिया से बात करने के लिए पूरी तरह तैयार था। स्व. अटल जी ने विश्व मंच पर हिंदी में बोलकर यह दिखाया था कि अपनी भाषा में बात करना आत्मविश्वास है, कोई सीमा नहीं।
आज करीब पाँच दशकों बाद हिंदी की यह यात्रा और भी व्यापक हो चुकी है। साहित्य और पत्रकारिता से लेकर सिनेमा, टेलीविजन, शिक्षा और डिजिटल दुनिया तक, हिंदी करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन चुकी है। डिजिटल इंडिया के युग में इंटरनेट, सोशल मीडिया, डिजिटल शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समय में हिंदी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है।
हिंदी अब केवल प्रशासन की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और आधुनिक अभिव्यक्ति की प्रभावी भाषा के रूप में आगे आ रही है।
हमारी जिम्मेदारी है कि हिंदी को नई पीढ़ी, नई तकनीक और नए अवसरों से जोड़ते हुए इसे ज्ञान, नवाचार और वैश्विक संवाद की और अधिक सशक्त भाषा बनाएँ।
आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

