Ganga News 24 | हरिद्वार | 28 अक्टूबर 2026 | प्रेस विज्ञप्ति
हमारे महान पूर्वजों, देवी-देवताओं पर आरोप लगाकर बदनाम करने का हो रहा षड्यंत्र: स्वामी रामदेव
त्रिदिवसीय 52वां अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन 29 से, सनातन शास्त्र शुद्धिकरण अभियान का होगा शुभारंभ
हरिद्वार। पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 से 31 अक्टूबर तक होने वाले 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन (AIOC) को लेकर दिव्य योग मंदिर, कृपालु बाग आश्रम, कनखल में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज और श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने सम्मेलन की जानकारी दी।
स्वामी रामदेव ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनातन धर्म के खिलाफ गहरी साजिश चल रही है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता सीता को मद्यपान-मांसाहार करने वाला, भगवान शिव को नशेड़ी, भगवान कृष्ण को विलासिता करने वाला, ब्रह्मा और देवी-देवताओं पर दुराचार तक के घिनौने आरोप लगाकर बदनाम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विगत 1000 सालों में मुगलों और अंग्रेजों द्वारा सनातन शास्त्रों में जानबूझकर मिलावट की गई। मनुस्मृति सहित स्मृति ग्रंथों, ब्राह्मण ग्रंथों, आरण्यक ग्रंथों और 18 पुराणों में प्रक्षेप (मिलावट) कर दिए गए ताकि आने वाली पीढ़ियों में सनातन के प्रति घृणा पैदा हो।
सनातन में कोई जातिभेद नहीं
स्वामी जी ने कहा कि सनातन धर्म में सभी जातियां समान हैं, सभी महान हैं। वर्ण व्यवस्था जन्म आधारित नहीं, कर्म आधारित है। जो अज्ञान मिटाए वो ब्राह्मण, जो अन्याय मिटाए वो क्षत्रिय, जो अभाव मिटाए वो वैश्य और जो अपवित्रता मिटाए वो शूद्र है। जहां भेद है, वह वेद है ही नहीं। विदेशियों ने इसी भेद के नाम पर फूट डालकर 100 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की लूट की।
शास्त्र शुद्धिकरण का बड़ा अभियान
उन्होंने बताया कि मैक्समूलर सहित विदेशी शासकों ने सनातन शास्त्रों की गलत व्याख्या की, जो आज भी ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड, कैंब्रिज जैसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जा रही है। अब गीता प्रेस, पतंजलि सहित सभी संस्थानों से प्रामाणिक प्रकाशन होगा, सभी प्रक्षेप हटाए जाएंगे।
धर्म विहीन कर ईसाई-मुसलमान बनाने का षड्यंत्र
स्वामी जी ने कहा कि सनातन को दोषपूर्ण बताकर करीब 30-40 करोड़ लोगों को धर्म से विमुख कर दिया गया। भारत के उभरते वर्चस्व से भारत विरोधी शक्तियां आतंकित हैं। अखंड भारत समेत आज भी 200 करोड़ सनातन धर्मी दुनिया में हैं और विश्व की आधी आबादी सनातन के वैज्ञानिक सिद्धांतों में निष्ठा रखती है।
52वें सम्मेलन में शीर्ष धर्मगुरु होंगे शामिल
29 से 31 अक्टूबर तक पतंजलि विश्वविद्यालय में होने वाले इस ऐतिहासिक गैर-राजनीतिक सम्मेलन का उद्घाटन महामहिम राज्यपाल करेंगे। इसमें सभी शंकराचार्य, शैव-वैष्णव संत, अखाड़ा परिषद, संत समिति, आचार्य महासभा के शीर्ष धर्मगुरु और देश-विदेश के 4 से 5 हजार संस्कृत विद्वान शामिल होंगे।
इस मौके पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, प्रति कुलपति डॉ. साध्वी देवप्रिया, AIOC महासचिव प्रो. कविता होले, संयुक्त सचिव प्रो. शिवानी वी., प्रो. अरुण रंजन मिश्रा, प्रो. रमाकांत पांडेय सहित कई विद्वान मौजूद रहेंगे।

