मातृ सदन में परम श्रद्धेय स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी (प्रो. जी. डी. अग्रवाल जी) की 9वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

*** मातृ सदन में स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी की 9वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित ***

आज दिनांक 11 अक्टूबर 2026 को मातृ सदन में परम श्रद्धेय स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी (प्रो. जी. डी. अग्रवाल जी) की 9वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी एक प्रख्यात पर्यावरणविद्, वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं गंगा संरक्षण के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले संत थे । IIT कानपुर के पूर्व प्राध्यापक एवं प्रतिष्ठित वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने अपना जीवन गंगा की अविरलता और निर्मलता की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। गंगा की अविरल धारा की मांग को लेकर उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया, जो सदैव पर्यावरण संरक्षण के संघर्ष को प्रेरित करता रहेगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मातृ सदन के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं द्वारा स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुआ। ऑनलाइन जुड़े प्रतिभागियों ने भी अपने-अपने स्थानों से स्वामी जी को नमन किया। नवरात्रि के अनुष्ठानों एवं तपस्या के कारण परम पूज्य गुरुदेव स्वामी श्री शिवानंद जी महाराज कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो सके, किंतु उन्होंने स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा कार्यक्रम की सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कराईं।

कार्यक्रम का संचालन सुश्री विधि वर्मा जी ने किया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम डॉ. विजय वर्मा जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी के साथ बिताए समय की स्पष्ट स्मृति है। उन्होंने स्वामी जी की विचारों की स्पष्टता, दूरदृष्टि और सिद्धांतों के प्रति उनकी दृढ़ता को याद करते हुए कहा कि वे स्वयं भी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हैं और सदैव उनका स्मरण करते हैं।

नई दिल्ली से जुड़ीं दिव्याशा जी ने कहा कि यद्यपि उन्हें स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी से व्यक्तिगत रूप से मिलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन मातृ सदन आने के बाद वे उनके कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों से गहराई से जुड़ गईं। उन्होंने ऐसे महान व्यक्तित्व के बारे में जानने के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।

सरकारी सेवा में कार्यरत राजीव नौटियाल जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि स्वामी जी के कार्यों और उनके संकल्पों को आगे बढ़ाया जाए। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी जसविंदर जी ने कहा कि वे मातृ सदन तथा स्वामी सानंद जी जैसे संतों से प्रेरणा लेकर पर्यावरण संबंधी चिंताओं के लिए संघर्ष करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् विकास रयाल जी ने भी कहा कि वे स्वामी जी जैसे संतों और मातृ सदन के कार्यों से प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

साध्वी पद्मावती जी ने आशा व्यक्त की कि स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी के बलिदान से प्रेरणा लेकर एक दिन गंगा अविरल रूप से प्रवाहित हो सकेगी और उस पर किसी प्रकार का अवरोध नहीं रहेगा।

ब्रह्मचारी सुधानंद ने कहा कि स्वामी सानंद जी जैसे संतों के संघर्ष ने हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए संवैधानिक अधिकारों एवं साधनों का उपयोग करने की प्रेरणा दी है। उन्होनें आत्मविज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच सामंजस्य को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के रूप में हमारा दायित्व है कि हम ऐसे महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लें, उनके सपनों को साकार करने के लिए खूब परिश्रम करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य छोड़कर जाएँ।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित एवं ऑनलाइन जुड़े प्रतिभागियों ने स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी के त्याग, तपस्या, संघर्ष और गंगा संरक्षण के प्रति उनके अद्वितीय समर्पण को पुनः स्मरण करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी अमर रहें।

ॐ शांति।

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