नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: बिना पक्ष सुने नहीं हटेगा अतिक्रमण, पूरे प्रदेश में सरकारी भूमि की जियो मैपिंग होगी

Ganga News 24 के लिए फाइनल खबर –


नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: बिना पक्ष सुने नहीं हटेगा अतिक्रमण, पूरे प्रदेश में सरकारी भूमि की जियो मैपिंग होगी

नैनीताल, 31 अक्टूबर 2026।

उत्तराखंड में सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने रामनगर के पूछड़ी और रानीखेत रोड के अतिक्रमणकारियों को बड़ी राहत देते हुए अगले 4 महीने तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, वहीं पूरे राज्य में अतिक्रमण रोकने के लिए सख्त कदम उठाने को कहा है।

क्या है मामला?
नैनीताल के पदमपुरी क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत पर दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा था। कोर्ट ने इस पत्र को स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान 31 अक्टूबर को रामनगर के पूछड़ी गांव में वन विभाग ने 28 बुलडोजर और 525 पुलिसकर्मियों की मदद से 81 पक्के मकानों को ध्वस्त कर करीब 5 हेक्टेयर वन भूमि को मुक्त कराया था।

इस कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

कोर्ट की खंडपीठ ने क्या कहा?
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि –

“पूछड़ी और रानीखेत रोड पर अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावितों का पक्ष सुना जाए। बिना सुनवाई के कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।”

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा है और फिलहाल 4 माह के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

पूरे राज्य के लिए बड़े निर्देश –

  1. स्टेटस रिपोर्ट: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति 3 सप्ताह के भीतर अतिक्रमण पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी।
  2. जियो मैपिंग अनिवार्य: सभी संबंधित विभागों को समस्त सरकारी भूमि – सड़क, नाले, वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्ग और निकाय की भूमि की जियो मैपिंग कराकर उसे डिजिटल पोर्टल पर सार्वजनिक करना होगा, ताकि भविष्य में अतिक्रमण पर रोक लगे।
  3. वन पंचायतों की सीमा: वन पंचायतों की सीमाएं निर्धारित करने के निर्देश।
  4. अवैध रिसॉर्ट्स पर एक्शन: खाम भूमि और अन्य स्थानों पर बने सभी अवैध रिसॉर्ट्स और अतिक्रमण को अविलंब हटाने को कहा।

वन अधिकार अधिनियम का पेंच –
ग्रामीणों का तर्क है कि नई बस्ती पूछड़ी को राजस्व ग्राम घोषित करने के दावे वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत लंबित हैं और 1 अक्टूबर 2026 को जिला स्तरीय समिति के समक्ष अपील भी लंबित है। अधिनियम के अनुसार जब तक दावों का निस्तारण न हो, बेदखली नहीं हो सकती।

हाईकोर्ट ने भी इस बिंदु को गंभीरता से लिया है और कहा है कि वन अधिकारों के दावों के निपटारे तक किसी को बेदखल न किया जाए।

अगली सुनवाई 4 माह बाद होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *