1998 का वो सियासी माहौल दिल्ली की गलियों में आज भी याद किया जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी मार्च में प्रधानमंत्री बने थे।

1998 का वो सियासी माहौल दिल्ली की गलियों में आज भी याद किया जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी मार्च में प्रधानमंत्री बने थे।

भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से काफी दूर। सहयोगी दलों के साथ मिलाकर भी आंकड़े नाजुक थे। हर हफ्ते एक या दो वोट के फेर में सरकार खतरे में नजर आती।

उसी दौरान बिहार की राजनीति का असर केंद्र तक पहुंच रहा था। 1998 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल को सत्रह सीटें मिली थीं। नीतीश कुमार की समता पार्टी को मात्र बारह सीटें हासिल हुईं। गणित के हिसाब से कुछ लोग सोचते कि अगर जरूरत पड़ी तो बड़ा फैसला लिया जा सकता है। इसी बीच अफवाहों का सिलसिला शुरू हो गया। कहा जाने लगा कि भाजपा लालू यादव से बातचीत कर रही है। समता पार्टी को अलग रखकर राष्ट्रीय जनता दल के साथ समझौता करके सरकार बचाने की कोशिश की जा रही है।

ये अफवाहें बार-बार उछलतीं, खासकर जब अविश्वास प्रस्ताव या समर्थन का सवाल उठता। कुछ लोग इसे मजबूरी बताते तो कुछ रणनीति। आखिर सत्रह सीटें बारह से ज्यादा थीं, और केंद्र में हर वोट कीमत का था। चाय की दुकानों से लेकर सांसदों के बीच चर्चा होती कि शायद अटल सरकार इस रास्ते पर चले।

लेकिन हकीकत अलग थी। नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडीस की समता पार्टी भाजपा की प्राकृतिक सहयोगी बन चुकी थी। दोनों पक्ष बिहार में लालू-राबड़ी सरकार के खिलाफ एक साथ खड़े थे। नीतीश रेल मंत्री बने और गठबंधन का फोकस बिहार में बदलाव लाने पर था। चारा घोटाले की जांच चल रही थी और विपक्षी दलों का दबाव बढ़ रहा था।

कोई औपचारिक बातचीत या गठबंधन कभी सामने नहीं आया। समता पार्टी पूरे समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ रही। अटल सरकार ने तेरह महीने तक संघर्ष किया। अंत में 1999 में दूसरे सहयोगी के समर्थन वापस लेने और एक वोट से हार का सामना करना पड़ा।

ये अफवाहें उस दौर की नाजुक राजनीति की कहानी बताती हैं। जब गणित थोड़ा सा भी डिगता, तो अटकलें आसमान छूने लगतीं। व्यक्तिगत रिश्ते, क्षेत्रीय समीकरण और सत्ता की मजबूरी सब मिलकर एक नाटक रचते थे। अटल की कुशलता ने उस वक्त को संभाला, जबकि बिहार की पुरानी राइवलरी दिल्ली तक की चर्चाओं में घुली रही। नीतीश और भाजपा का बाद का लंबा सफर यही दिखाता है कि कुछ रिश्ते अफवाहों से परे मजबूत होते हैं।

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