उत्तराखंड में चार धाम यात्रा पर्यावरण संरक्षण व वन्य जीव संरक्षण के साथ ही होनी चाहिए “

तीर्थों को पर्यटन में परिवर्तित कर दिया गया है जिसके कारण पहाड़ों में पर्यावरण को अत्यधिक क्षति पहुंच रही है जितना हेलीकॉप्टर का संचालन होगा उतना ही वन्य जीव असुरक्षित और पलायन के लिए मजबूर होंगे तथा ध्वनि प्रदूषण के कारण अन्य प्रजातियां भी लुप्त होती जायेगी हिमालय बचाओ भी जरूरी है तापमान बढ़ने के कारण हिमालय के हिमखंड अत्यधिक पिघलेंगे जिससे आपदा का जयादा खतरा हो जाता है.
शासन प्रशासन को चार धाम यात्रा पर्यावरण व वन्य जीवो को संरक्षित हुए भी करानी चाहिए.
जिसमें यात्रियों की संख्या हर धाम में प्रतिदिन सुनिश्चित हो और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो.
जब तक हम प्रकृति के साथ सामंजस्य से मिलकर नहीं चलेंगे तक हमारा कोई भी कार्य सफल नहीं होगा अगर हम प्रकृति को नुकसान पहुंचाएंगे तो सभी को भयावह परिणाम भुगतने होंगे.

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