बनभूलपुरा कांड हल्द्वानी दंगा नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने माना गलत राज्य सरकार की बड़ी जीत

*उत्तराखंड राज्य के उप महाधिवक्ता कार्यालय, सर्वोच्च न्यायाल 8 फरवरी 2024, बनभूलपुरा हल्द्वानी दंगा*मुख्य बातें:*1. *सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई*: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने उत्तराखंड सरकार की एसएलपी पर सुनवाई की।

राज्य ने नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा 2 मुख्य आरोपी जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को दी गई डिफॉल्ट बेल को चुनौती दी थी।2. *दंगा का मामला*: 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा, हल्द्वानी में हिंसक भीड़ ने फायरिंग की, पत्थर और पेट्रोल बम फेंके, पुलिस वाहन जलाए और महिला कांस्टेबलों को थाने में बंद कर थाने में आग लगा दी थी। IPC, UAPA की धारा 15-16, आर्म्स एक्ट आदि के तहत 3 FIR दर्ज हुईं।3. *राज्य का पक्ष*: उप महाधिवक्ता जतिंदर कुमार सेठी और स्थायी अधिवक्ता आशुतोष कुमार शर्मा ने पैरवी की। आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल थे।4. *सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी*: – हाईकोर्ट “पूरी तरह गलत” था। – जांच एजेंसी ने बड़े पैमाने पर आगजनी, दंगा और थाने सहित सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के मामले में “अत्यंत तत्परता” से जांच की। – हाईकोर्ट ने जांच पर तथ्यात्मक रूप से गलत बयान दिए और अनुचित टिप्पणी की। – आरोपी ने समय विस्तार और जमानत खारिज के आदेश को चुनौती नहीं दी, 2 महीने बाद अपील की। अपनी सहमति से डिफॉल्ट बेल का अधिकार खो दिया।5. *आदेश*: हाईकोर्ट का डिफॉल्ट बेल का आदेश रद्द। आरोपियों को 2 हफ्ते में ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करना होगा, नहीं तो कोर्ट कड़ी कार्रवाई कर हिरासत में लेगा।*राज्य का रुख*: राज्य अभियोजन इसे बड़ी जीत मान रहा है। यह मामला राज्य की कानून-व्यवस्था पर ही हमला था, जब अतिक्रमण विरोधी अभियान का विरोध हुआ। पुलिस विभाग के लिए ये बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने तेज जांच की सराहना की।

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