सब पत्रकार बन गए तो व्यवस्था बिगड़ेगी: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में ‘कौन है असली पत्रकार’ – इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लंबी बहस हुई। CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि अगर हर नागरिक को पत्रकार मान लिया गया तो व्यवस्थागत दिक्कतें पैदा होंगी।
दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और अन्य की याचिका में कहा गया था कि विरोध-प्रदर्शन कवर करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों को पुलिस PIB मान्यता मांगकर रोक देती है। इस पर कोर्ट ने पत्रकारिता की 5 श्रेणियां गिनाईं:
- PIB मान्यता प्राप्त
- पंजीकृत अखबार/चैनल के पत्रकार
- स्वतंत्र-फ्रीलांस पत्रकार
- यूट्यूब-इन्फ्लुएंसर
- रील बनाकर खुद को पत्रकार बताने वाले
SG तुषार मेहता ने कहा – विरोध स्थलों पर पेशेवर पत्रकारों से ज्यादा रील बनाने वालों की भीड़ आती है। CJI ने कहा “हर कोई पत्रकार बनने लगेगा तो दूसरों के लिए समस्या होगी।” मामले की अगली सुनवाई बाकी है।

