GANGA NEWS 24 | नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026
7वां नदी उत्सव नदियों की रक्षा के संकल्प के साथ संपन्न
“नदियों को बहने दो, जल का सम्मान करो” – डॉ राधिका नागरथ
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), नई दिल्ली में नदी संरक्षण पहलों के अंतर्गत आयोजित 7वां नदी उत्सव सकारात्मक रूप से संपन्न हुआ। संहिता फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस उत्सव में विद्वानों, पर्यावरणविदों, नीति निर्माताओं, कलाकारों और नागरिकों ने यमुना की सांस्कृतिक विरासत, पारिस्थितिक चुनौतियों और सतत पुनरुद्धार पर मंथन किया।
“नदी और जल से संबंध: जल संधि और जल प्रलय के दौर में भारत का जल धर्म” शीर्षक से एक विशेष सत्र आयोजित किया गया।
मुख्य वक्ता डॉ राधिका नागरथ (अंग्रेजी साहित्यकार, लेखिका, चिंतक) ने समापन सत्र में कहा:
यमुना और गंगा को सजीव इकाई घोषित करने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 2017 के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने 4 महीने में रोक लगा दी थी, क्योंकि कानून नदी को मनुष्य के समान नहीं मानता। नदी को सजीव इकाई घोषित करने का उद्देश्य केवल नदियों के स्वच्छ और निर्बाध बहने के अधिकार को संरक्षित करना था।
उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी और जागरूकता के बिना नदियों को स्वच्छ रखना असंभव है। सीन, राइन और टेम्स नदियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने सरकार से नदी तटों पर बेहतर सुविधाएं और नदी को शहर से अलग करने वाली दीवारें बनाने का आग्रह किया ताकि मानव अपशिष्ट नदियों तक न पहुंचे। केवल दंडात्मक कार्रवाई से नदी नहीं बचेगी।
भावपूर्ण अपील: “नदियों को बहने दो, जल का सम्मान करो।”
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
- डॉ तेनजिन डोल्मा (निर्वासित तिब्बती सरकार से संबद्ध शोधार्थी) ने बताया – विश्व के 45% बांध चीन द्वारा, 9% भारत द्वारा, 6% जापान और 14% अमेरिका द्वारा निर्मित हैं। चीन के अत्यधिक निर्माण ने हिमनदों के पिघलने और बाढ़ की समस्या बढ़ाई है।
- डॉ ओंकार मित्तल, विद्या भूषण रावत, प्रदीप डिमरी ने बढ़ते जल परियोजनाओं और मानव जनित खतरों पर चिंता जताई।
- कौशल किशोर (संहिता फाउंडेशन) ने वैज्ञानिक जी.डी. अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद और स्वामी निगमानंद को याद किया, जिन्होंने गंगा पर बन रही परियोजनाओं के विरोध में उपवास कर प्राणों की आहुति दी।
- निमिषा सिंह और ताशी डेकी ने हिमालय में ओक के घटते और चीड़ के बढ़ते जंगलों से हरे आवरण के संकट पर चिंता जताई।
सर्वसम्मत आवाज: नदियों का सम्मान हो, नदियों पर निर्माण और पहाड़ों को नष्ट करने पर रोक लगे।

