ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से निपटने के लिए जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की भागीदारी जरूरी: डॉ. धकाते
देहरादून, 09 सितंबर 2026। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), देहरादून द्वारा आज सचिवालय मीडिया सेंटर में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, लीगेसी वेस्ट रेमेडिएशन और वायु प्रदूषण नियंत्रण पर विस्तार से जानकारी दी गई।
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरे की मात्रा बढ़ रही है। वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के साथ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

नए नियम 2026 की मुख्य बातें –
- 1 अप्रैल 2026 से लागू नए नियमों में कचरे का 4 धाराओं में पृथक्करण – गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा
- बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारी बढ़ी, EBWGR (Extended Bulk Waste Generator Responsibility) लागू
- कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण की ऑनलाइन निगरानी और डिजिटल पंजीकरण
- लैंडफिल अंतिम विकल्प, रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी पर जोर
उत्तराखंड की स्थिति पर आंकड़े –
डॉ. धकाते ने बताया कि उत्तराखंड में –
- 108 शहरी निकायों के 1,314 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण
- 1,515 वाहन उपलब्ध, अतिरिक्त खरीद जारी, नए वाहनों में 4 कंपार्टमेंट
- 1,225 वार्डों में स्रोत पर पृथक्करण शुरू
- रोज 1,930.85 मीट्रिक टन कचरा, जिसमें से 1,804.59 टन (93.46%) का रोज प्रसंस्करण
- 61 लीगेसी डंपसाइट चिन्हित, 23.34 लाख टन में से 12.70 लाख टन (54.41%) का उपचार पूरा
- दिसंबर 2026 तक सभी पुराने कचरे के उपचार का लक्ष्य
- 85 MRF, 663 NADEP/कम्पोस्ट पिट, 87 प्लास्टिक कॉम्पैक्टर, 1,058 बल्क वेस्ट जनरेटर चिन्हित
- VLTS (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम) लागू, पहले चरण में सभी नगर निगम कवर
चारधाम के लिए विशेष योजना –
अपर निदेशक शहरी विकास श्री प्रवीण कुमार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ठोस अपशिष्ट नियमों के सख्त पालन और BWGs की जवाबदेही पर जोर दिया है। भारत ‘जीरो डंपसाइट’ लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। पुराने कचरे से सड़क निर्माण सामग्री, RDF आदि बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मेयर, पार्षद, जनप्रतिनिधियों को नागरिकों को 4-स्तरीय पृथक्करण के लिए प्रेरित करना होगा। चारधाम और पर्यटन क्षेत्रों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए विशेष SWM योजना पर जोर दिया गया। पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों से यूजर शुल्क, पर्यटकों के आगमन को नियंत्रित करना, विशेष संग्रहण केंद्र बनाने जैसे प्रावधान भी नियमों में हैं।
ग्राम पंचायत से केंद्रीय स्तर तक प्रभावी निगरानी और ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था की जा रही है।
संपादक: कुलदीप शर्मा | Ganga News 24 | Dehradun

