सिंधु जल समझौते पर भारत ने खारिज किया हेग कोर्ट का फैसला, कहा – अधिकार क्षेत्र में नहीं


सिंधु जल समझौते पर भारत ने खारिज किया हेग कोर्ट का फैसला, कहा – अधिकार क्षेत्र में नहीं

नई दिल्ली। भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित कथित मध्यस्थता अदालत के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि इस संस्था को भारत के संप्रभु फैसलों और जलविद्युत परियोजनाओं पर आदेश देने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।

भारत ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला अभी भी लागू है। यह विवाद जम्मू-कश्मीर की रातले सहित पनबिजली परियोजनाओं से जुड़ा है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को स्थगित किया था।

“खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1960 में नेहरू सरकार द्वारा हस्ताक्षरित इस संधि के संदर्भ में यह दो-टूक संदेश दिया है।

2014 से पहले बनाम 2014 के बाद : आतंक के डर से निर्णायक जवाब तक

2004-2013 के बीच देश में 5,249 आतंकी घटनाएं हुईं, जिनमें 6,278 लोगों की मौत हुई। औसतन 525 घटनाएं प्रति वर्ष। 26/11 मुंबई हमला इसी दौर में हुआ। उस समय रेलवे स्टेशनों पर “संदिग्ध सामान और बम से सावधान” की घोषणाएं आम थीं।

2014 के बाद सरकार ने निर्णायक कार्रवाई की नीति अपनाई –

  • 2016 उरी हमला – सर्जिकल स्ट्राइक
  • 2019 पुलवामा हमला – बालाकोट एयर स्ट्राइक
  • 2025 पहलगाम हमला – ऑपरेशन सिंदूर

अब रेलवे स्टेशनों पर “वंदे मातरम्” की धुन सुनाई देती है। संदेश स्पष्ट है कि आतंकवाद का जवाब अब सिर्फ बयानों से नहीं, निर्णायक कार्रवाई से दिया जाता है।

पाकिस्तान की बढ़ी आर्थिक चिंता

सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की कृषि और सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ है। पानी की उपलब्धता पर दबाव से उसकी कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

वहीं अमेरिका में भी पाकिस्तान को झटका लगा है। वाशिंगटन में सिंधु जल संधि पर हुई एक पॉलिसी चर्चा में रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी पक्ष ने कहा कि राजनीतिक और सुरक्षा विवादों को IWT से पीछे हटने का बहाना नहीं बनाना चाहिए, लेकिन कार्यक्रम में एक भी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल नहीं हुआ, जिससे पाकिस्तान के नैरेटिव को झटका माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *